धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: जंतर-मंतर पर जश्न, अभिजीत दीपके बोले- झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए
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नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। शनिवार को अपने त्यागपत्र की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि वे पिछले 10 दिनों से काफी व्यथित थे और छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देना चाहते।

जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच जश्न का माहौल छा गया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने इस कदम पर तंज कसते हुए कहा, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।

दीपके ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने मांग की कि जिन छात्रों ने इस दौरान आत्महत्या की है, उनके परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही, उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की।

इस्तीफे के पीछे की बड़ी वजह धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि 20 जून से जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का विरोध प्रदर्शन और विपक्ष का भारी दबाव इस निर्णय का कारण बना।

प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि वे नहीं चाहते कि जंतर-मंतर की स्थिति का फायदा राष्ट्र विरोधी ताकतें उठाएं। साथ ही, वे यह भी चाहते हैं कि देश के छात्र कानूनी पेचीदगियों में न उलझें और अपने भविष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

छात्रों के भविष्य के लिए लिया फैसला शिक्षा मंत्री ने अपने पिछले चार दशकों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा से शिक्षा सुधार के प्रति समर्पित रहे हैं। उन्होंने नीट-यूजी परीक्षा में हुई अनियमितताओं का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंपा था और दोबारा परीक्षा कराने का साहसी निर्णय लिया था।

उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में नीट की परीक्षाओं को पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे। फिलहाल, इस इस्तीफे को शिक्षा प्रणाली में चल रहे बड़े विवादों के पटाक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

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