भारत ने अपनी रक्षा शक्ति में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ते हुए स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम कुशा का सफल परीक्षण कर लिया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा तट के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से इस मिसाइल की मारक क्षमता का प्रदर्शन किया।
यह मिसाइल सिस्टम 400 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के किसी भी हवाई खतरे—चाहे वह फाइटर जेट हो, ड्रोन हो या लंबी दूरी की मिसाइल—उसे हवा में ही नेस्तनाबूद करने में सक्षम है।
माता सीता के कुशा से प्रेरित नाम इस मिसाइल का नाम पौराणिक कथाओं से प्रेरित है। रामायण में माता सीता ने घास के एक तिनके (कुशा) का उपयोग कर रावण जैसे शक्तिशाली राक्षस को अपने पास फटकने भी नहीं दिया था। ठीक उसी तरह, भारत का यह प्रोजेक्ट कुशा दुश्मन के फाइटर जेट और मिसाइलों के लिए अभेद्य दीवार साबित होगा। भारत के हवाई क्षेत्र में घुसने से पहले ही दुश्मन को अब हजार बार सोचना पड़ेगा।
DRDO की बड़ी उपलब्धि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परीक्षण की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि यह देश की वायु रक्षा क्षमता में एक बड़ी छलांग है। अब तक केवल दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही लंबी दूरी की ऐसी मिसाइल प्रणाली विकसित करने की क्षमता थी। इस स्वदेशी सिस्टम के आने से भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
21,700 करोड़ का प्रोजेक्ट और तीन तरह की मिसाइलें सरकार ने 2023 में इस 21,700 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। योजना के तहत DRDO तीन अलग-अलग रेंज की मिसाइलें विकसित कर रहा है:
इन मिसाइलों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये बेहद कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लो-रडार क्रॉस सेक्शन वाले टारगेट्स और स्टील्थ फाइटर जेट्स को भी मार गिरा सकें। DRDO का लक्ष्य 2028-29 तक इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से सेना में शामिल करना है।
रूस के S-400 का स्वदेशी विकल्प भारत ने 2018 में रूस से S-400 मिसाइल प्रणाली खरीदी थी, जो फिलहाल सीमा पर तैनात है। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बाकी स्क्वाड्रन मिलने में देरी हो रही थी, लेकिन अब कुशा के सफल परीक्षण ने भारत को आत्मनिर्भरता की राह दिखा दी है। नया सिस्टम मोबाइल होगा, जिसे आसानी से कहीं भी तैनात किया जा सकेगा और भारतीय वायु सेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से जोड़ा जाएगा।
भारत का रक्षा कवच: कुशा से आकाश तक फिलहाल भारत की वायु रक्षा का ढांचा तीन स्तरों पर काम कर रहा है:
प्रोजेक्ट कुशा की सफलता यह सुनिश्चित करती है कि भारत की सीमाएं अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हैं और कोई भी दुश्मन भारतीय वायु सीमा में सेंध लगाने की हिमाकत नहीं कर सकेगा।
The @DRDO_India has successfully conducted the maiden flight test of Long-Range Surface-to-Air Missile Kusha today from the APJ Abdul Kalam Island off the coast of Odisha.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) July 23, 2026
Kusha missile system is capable of neutralising wide variety of aerial threats including fighter jets,… pic.twitter.com/EceUgGM1HR
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