आज 24 जुलाई 2026 को पुरी में बहुड़ा यात्रा का भव्य आयोजन हो रहा है। नौ दिनों तक अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर में विश्राम करने के बाद, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा आज अपने मुख्य श्रीमंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। ओड़िया संस्कृति में इसे बाउड़ा जात्रा कहा जाता है।
क्या है बहुड़ा यात्रा का महत्व? यह यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। बहुड़ा यात्रा का अर्थ है भगवान की उलटी यात्रा । मान्यता है कि प्रभु जगन्नाथ अपनी मौसी गुंडिचा को वचन देकर जाते हैं कि वे अगले वर्ष फिर आएंगे। भक्तों के लिए यह यात्रा भावुक कर देने वाली होती है, क्योंकि यह एक बार फिर प्रभु के अपने भक्तों से दूर होने का समय होता है।
महाप्रभु का प्रिय पोड़ा पीठा गुंडिचा मंदिर से वापसी के समय माता उन्हें पोड़ा पीठा का विशेष भोग लगाती हैं। यह ओडिशा का पारंपरिक मिष्ठान है, जिसे चावल, नारियल, गुड़ और घी से तैयार किया जाता है। माना जाता है कि यह भोग भगवान बलभद्र को अत्यंत प्रिय है। इसे पूरी रात चूल्हे की धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे यह बेहद नरम हो जाता है।
लक्ष्मी मां का लंबा इंतजार और मान-मनौव्वल जब प्रभु अपनी मौसी के घर आनंद ले रहे होते हैं, तब श्रीमंदिर में माता लक्ष्मी अकेली उनका इंतजार कर रही होती हैं। निलाद्री बिजे के दिन जब प्रभु लौटते हैं, तो माता लक्ष्मी सिंह द्वार पर उनका रास्ता रोकती हैं। इसे लक्ष्मी-नारायण भेंट कहा जाता है।
परंपराओं का अनूठा संगम इस रस्म के दौरान एक दिलचस्प परंपरा निभाई जाती है। जब भगवान बलभद्र की पालकी सामने आती है, तो माता लक्ष्मी पर्दा कर लेती हैं, क्योंकि बड़े भाई अपनी छोटी बहू का चेहरा नहीं देखते। इसके बाद, देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए भगवान जगन्नाथ उन्हें साड़ी भेंट करते हैं और रसमलाई (रसगुले) का भोग लगाते हैं।
इस मान-मनौव्वल के बाद ही माता लक्ष्मी मुख्य द्वार खोलती हैं और भगवान जगन्नाथ अपने गर्भगृह में पुन: विराजमान होते हैं। इसके साथ ही रथयात्रा का यह पावन महाउत्सव संपन्न हो जाता है। आज के दिन मंदिर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है।
#WATCH | Puri, Odisha: Artists perform, rejoice, and celebrate Bahuda Yatra in Puri.
— ANI (@ANI) July 24, 2026
The festival marks the return journey of Lord Jagannath, Lord Balabhadra, and Goddess Subhadra to the Jagannath Temple from the Gundicha Temple. pic.twitter.com/QS3Y3RpuhH
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