छात्रों को दुश्मन मान रही मोदी सरकार : सोनिया गांधी का तीखा हमला, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
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नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा विवाद और बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ देशभर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर छात्रों के साथ अपराधी जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया है।

वे बच्चे हैं, अपराधी नहीं

सोनिया गांधी ने हालिया छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को बेहद शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा, सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों से ऐसा व्यवहार कर रही है, मानो वे देश के भविष्य नहीं बल्कि दुश्मन हों। उन्होंने साफ किया कि इन छात्रों की मांगें राजनीतिक नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर हैं। सरकार को बल प्रयोग की जगह इन युवाओं से संवाद करना चाहिए।

पेपर लीक और NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल

सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को निशाने पर लेते हुए कहा कि केंद्रीकृत परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि NTA संसाधनों की कमी से जूझ रही है और निजी एजेंसियों पर निर्भर है, जिससे परीक्षाओं की शुचिता खतरे में है।

शिक्षा बजट में कटौती और निजीकरण का आरोप

शिक्षा क्षेत्र के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्कूल और उच्च शिक्षा के बजट में लगातार कटौती की गई है। सरकारी स्कूलों को बंद कर निजी संस्थानों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका सीधा बोझ छात्रों की जेब पर पड़ रहा है। UGC द्वारा फंड कम करने से विश्वविद्यालयों को मजबूरन फीस बढ़ानी पड़ रही है।

राहुल गांधी की सख्त मांग: शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करें

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के रवैये की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग छात्रों की मांग है। राहुल ने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं:

  1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाया जाए।
  2. छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
  3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद छात्रों से माफी मांगें।

बढ़ती बेरोजगारी और भविष्य का संकट

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्नातक युवाओं के बीच बेरोजगारी दर 40 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत और नौकरी के सीमित अवसरों ने युवाओं में भारी निराशा पैदा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को भी बिना पर्याप्त संसदीय चर्चा के लागू करने का आरोप लगाया गया है।

फिलहाल, जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों का प्रदर्शन जारी है। छात्रों की मांग है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाएं और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करे।

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