पेपर लीक पर PM मोदी का कड़ा रुख: दोषियों को बख्शेंगे नहीं, कल कैबिनेट में लेंगे बड़े फैसले
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देशभर में लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों और छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात एक अहम वीडियो संदेश जारी किया है। पीएम ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लिया जा रहा।

कैबिनेट बैठक में होंगे कड़े फैसले प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि 24 जुलाई को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाने पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि यह मामला लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

दोषी सलाखों के पीछे पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने इस दिशा में कई बड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पेपर लीक में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और अब तक पकड़े गए आरोपी जेल की हवा खा रहे हैं। इससे पहले भी पीएम ने स्पष्ट किया था कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर रही है।

CJP का कड़ा विरोध जारी दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रधानमंत्री के इस बयान से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। CJP का कहना है कि सिर्फ दोषियों को सजा देना समाधान नहीं है, बल्कि समस्या की जड़ यानी सिस्टम की खामियों को सुधारना जरूरी है। संगठन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग दोहराते हुए जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।

जवाबदेही और निष्पक्षता पर सवाल CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने तंज कसते हुए कहा कि आंदोलन के डेढ़ महीने बाद पीएम की प्रतिक्रिया आई है, जो स्वागत योग्य है, लेकिन यह नाकाफी है। रांका ने सवाल उठाया कि बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही है?

ठोस नतीजों की मांग सरकार की ओर से बातचीत के प्रस्ताव पर CJP ने साफ कर दिया है कि उन्हें सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं चाहिए। संगठन का कहना है कि वे किसी ठोस आश्वासन और समयसीमा पर ही चर्चा के लिए तैयार हैं। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थान को लेकर भी गतिरोध बना हुआ है, क्योंकि CJP जेपी नड्डा के आवास पर बैठक के बजाय किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत चाहती है।

20 जून से जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन अब केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग को लेकर और व्यापक हो गया है। अब नजरें 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं कि सरकार क्या ठोस नीतिगत बदलाव पेश करती है।

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