मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते संकट को कम करने के लिए कतर ने पहल की है। शुक्रवार को कतर का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा, ताकि दोनों देशों के बीच रुकी हुई बातचीत को दोबारा शुरू कराया जा सके।
अमेरिका की सहमति से शुरू हुई मध्यस्थता यह कूटनीतिक यात्रा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह अमेरिका के साथ पूर्ण समन्वय में की गई है। जानकारों का कहना है कि 9 जुलाई के बाद से दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियों में आई मामूली नरमी ने बातचीत के लिए एक छोटी सी खिड़की खोली है। कतर का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच उपजे अविश्वास को खत्म कर शांति की बहाली करना है।
कैसे गहराया था मिडिल ईस्ट में संकट? हालिया तनाव की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद हुई। अमेरिका ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और कई ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर दिए, जिससे पूरा क्षेत्र युद्ध की दहलीज पर खड़ा हो गया था।
पर्दे के पीछे कूटनीति का खेल अमेरिकी नीति अब नियंत्रित तनाव पर आधारित है। वाशिंगटन का मानना है कि सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अब बातचीत को मौका दिया जाना चाहिए। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही सैन्य विकल्प मेज पर तैयार हैं, लेकिन फिलहाल उनकी प्राथमिकता कूटनीतिक रास्तों के जरिए समाधान ढूंढने की है।
क्या पटरी पर आएगी बातचीत? कतर ने पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। 7-8 जुलाई को हुए हिंसक संघर्ष के बाद बातचीत पूरी तरह ठप हो गई थी। अब क्षेत्रीय देशों की कोशिश है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते इस ज्वालामुखी को शांत किया जाए। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान कि ईरान के साथ युद्धविराम समझौता उनके लिए खत्म हो चुका है, इन कोशिशों की राह में बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि कतर की यह यात्रा तनाव को कम करने में कितनी सफल हो पाती है।
Qatari negotiators travel to Iran in efforts to resume US-Iran talks, de-escalate tensions
— ANI Digital (@ani_digital) July 10, 2026
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