दिल्ली को सांस देने का बड़ा मास्टर प्लान: ₹8,300 करोड़ के क्लीन एयर मिशन का आगाज
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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ₹8,300 करोड़ की सात वर्षीय कार्ययोजना का ऐलान किया है।

सात साल का मिशन, विश्व बैंक का बड़ा साथ यह मिशन पूरी तरह से तकनीक और समयबद्ध रणनीति पर आधारित है। इस परियोजना की कुल लागत का 65 प्रतिशत हिस्सा विश्व बैंक उठाएगा, जबकि 35 प्रतिशत राशि दिल्ली सरकार द्वारा वहन की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल कागजी योजना नहीं, बल्कि एक परिणाम-उन्मुख (result-oriented) कार्यक्रम है।

आधुनिक तकनीक और बेहतर निगरानी इस मिशन के तहत दिल्ली की एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रणाली को अत्याधुनिक बनाया जाएगा। डेटा-आधारित निर्णयों के लिए शहर भर में रियल-टाइम मॉनिटरिंग और प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान पर जोर दिया जाएगा। इससे नीति निर्माण में अधिक पारदर्शिता और गति आएगी।

इलेक्ट्रिक वाहनों और बुनियादी ढांचे पर जोर सरकार की नई रणनीति में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता दी गई है। दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह से इको-फ्रेंडली बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही, पूरे शहर में 32,000 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम होगा।

धूल, कचरा और यमुना की सफाई प्रदूषण के प्रमुख कारकों पर लगाम लगाने के लिए सरकार सख्त कदम उठाएगी। इसमें निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण और कचरा जलाने की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा, हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए 70 लाख पौधारोपण का अभियान चलेगा और यमुना नदी के पुनर्जीवन कार्य में भी तेजी लाई जाएगी।

सभी विभागों का एकीकृत प्रयास मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि स्वच्छ हवा केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और भविष्य का विषय है। इस अभियान की सफलता के लिए दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री पर्वेश साहिब सिंह, आशीष सूद और मंजींदर सिंह सिरसा के साथ-साथ विश्व बैंक के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी भी मौजूद रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सात वर्षीय मिशन अपनी तय समय सीमा के अनुसार लागू होता है, तो दिल्ली की वायु गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

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