ईरान में अमेरिकी हमले: चाबहार पोर्ट को नुकसान, क्या भारत ने बनाई इस प्रोजेक्ट से दूरी?
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब भारत के रणनीतिक हितों पर भी असर डालता दिख रहा है। हालिया अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान के चाबहार बंदरगाह के मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर को नुकसान पहुंचा है। इस हमले में चाबहार फ्री ज़ोन का एक गोदाम भी क्षतिग्रस्त हुआ है।

हमले की गंभीरता और ईरान का दावा ईरान के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बुधवार और गुरुवार को हुए अमेरिकी हमलों में ईरान के पांच प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें 14 नागरिकों की मौत हो गई और 78 लोग घायल हुए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कुवैत, बहरीन और कतर स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।

बजट में अनदेखी, क्या भारत हो रहा है पीछे? चाबहार बंदरगाह भारत की कनेक्टिविटी रणनीति का केंद्र रहा है। पिछले साल भारत ने इस परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन इस बार केंद्रीय बजट में इसके लिए कोई फंड आवंटित नहीं किया गया है। यह पहली बार है जब भारत ने इस साझा परियोजना से अपना वित्तीय हाथ पीछे खींचा है।

क्यों भारत के लिए अहम है चाबहार? भारत के लिए चाबहार पोर्ट कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

अमेरिकी दबाव और भू-राजनीतिक चुनौतियां विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह कदम अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से प्रेरित है। डॉ. मुदस्सिर कमर के अनुसार, भारत को मिली अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट जल्द ही खत्म होने वाली है। अमेरिका के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देते हुए भारत किसी भी तरह का जोखिम लेने से बच रहा है।

साथ ही, ईरान में जारी अस्थिरता और युद्ध के संभावित खतरों ने बड़े निवेश को अनिश्चित बना दिया है। प्रोफ़ेसर फ़ज्ज़ुर्रहमान खान का कहना है कि भारत एक महाशक्ति को नाराज करने का रिस्क नहीं लेना चाहता।

क्या भारत पूरी तरह हट रहा है? अधिकारिक तौर पर भारत ने अभी तक चाबहार से पीछे हटने की बात नहीं स्वीकारी है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका और ईरान दोनों के संपर्क में है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत फिलहाल कूटनीतिक रास्ता तलाश रहा है ताकि 2024 में हुए 10 साल के संचालन समझौते को बचाए रखा जा सके।

फिलहाल, चाबहार पोर्ट पर मंडराते युद्ध के बादल और भारत की वित्तीय चुप्पी ने इस रणनीतिक परियोजना के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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