दिल्ली के हर स्कूल में POCSO जागरूकता माह : बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा अभियान
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दिल्ली सरकार ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राजधानी के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में विशेष अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि पूरा जुलाई महीना POCSO जागरूकता माह (POCSO Awareness Month) के रूप में मनाया जाएगा।

बच्चों को सिखाया जाएगा गुड टच और बैड टच का फर्क इस अभियान का मुख्य केंद्र बिंदु बच्चों को जागरूक करना है। स्कूलों में छात्रों को उनकी उम्र के अनुसार गुड टच और बैड टच के बीच का अंतर समझाया जाएगा। बच्चों को सिखाया जाएगा कि यदि कोई उनके साथ अनुचित व्यवहार करता है, तो उसे कैसे पहचानें और बिना किसी डर के तुरंत मदद कैसे मांगें।

अनिवार्य होंगे चाइल्ड सेफ्टी प्रोटोकॉल सरकार ने सभी स्कूलों के लिए चाइल्ड सेफ्टी प्रोटोकॉल अनिवार्य कर दिए हैं। अब स्कूलों को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिसमें छात्र बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। इन शिकायतों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करना स्कूल प्रशासन की जवाबदेही होगी। सभी संस्थानों को 15 दिनों के भीतर अपनी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) जमा करनी होगी।

POCSO एक्ट और कानूनी अधिकारों की जानकारी अभियान के दौरान बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को भी Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act, 2012 के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया जाएगा। विशेषज्ञों द्वारा बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा उपायों और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी ताकि किसी भी संदिग्ध स्थिति में त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

शिक्षकों और स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण यह अभियान केवल छात्रों तक सीमित नहीं है। स्कूल के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें सिखाया जाएगा कि वे बच्चों के व्यवहार में बदलाव को कैसे पहचानें और दुर्व्यवहार की आशंका होने पर कानूनन क्या कदम उठाएं।

मजबूत होगा इंटरनल रिपोर्टिंग सिस्टम सरकार ने स्कूलों में एक मजबूत इंटरनल रिपोर्टिंग मैकेनिज्म बनाने पर जोर दिया है। इसके तहत शिकायतों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और पीड़ित बच्चों को जरूरी मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, यह पहल बच्चों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि हर बच्चा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और स्कूल का वातावरण पूरी तरह सुरक्षित और भयमुक्त बने।

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