खाड़ी में भारत की गूंज: जयशंकर के दौरे से मजबूत हुए रक्षा और समुद्री सुरक्षा के धागे
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कुवैत और ओमान का हालिया दौरा भारत की पश्चिम एशिया नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिहाज से अहम इन देशों के साथ भारत ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को एक नया मुकाम दिया है।

कुवैत के साथ रक्षा और सुरक्षा पर बड़ी डील कुवैत यात्रा के दौरान, जयशंकर ने वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ गहन चर्चा की। प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह के साथ हुई मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों के विजन पर सहमति बनी।

सबसे महत्वपूर्ण चर्चा कुवैत के रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह के साथ हुई। इस दौरान रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत के व्यापारिक हितों के लिए इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा अब अनिवार्य हो गई है।

प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर जोर कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह के साथ बैठक में क्षेत्रीय संघर्षों के वैश्विक प्रभाव पर गहरी चिंता जताई गई। जयशंकर ने कुवैत में रह रहे विशाल भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए वहां की सरकार का आभार व्यक्त किया।

इसके अलावा, निवेश, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की गई। विदेश मंत्री ने वहां भारतीय समुदाय से सीधा संवाद किया और वैश्विक मंच पर भारत की बदलती छवि और बढ़ती धमक के बारे में विस्तार से चर्चा की।

ओमान में मिला गर्मजोशी भरा स्वागत कुवैत के बाद ओमान पहुंचे विदेश मंत्री का भव्य स्वागत हुआ। ओमान के विदेश मंत्रालय के महानिदेशक शेख अहमद अल मस्करी ने उनकी अगवानी की। यह दौरा भारत-ओमान संबंधों को नई गति देने वाला माना जा रहा है, जो सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के दृष्टिकोण से बेहद अहम है।

अब न्यूयॉर्क में दिखेगा भारत का दम खाड़ी देशों की सफल यात्रा के बाद एस. जयशंकर का अगला पड़ाव न्यूयॉर्क है। 13 जुलाई को वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत के वर्ष 2028-29 के अभियान का आधिकारिक आगाज करेंगे।

यह अभियान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती दावेदारी को मजबूती देगा। इसके तुरंत बाद, 14-15 जुलाई को वे ब्रसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ (EU) ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की तीसरी बैठक में हिस्सा लेंगे, जहां व्यापार और नई तकनीक पर रणनीतिक चर्चा की जाएगी।

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