ममता बनर्जी को जोरदार झटका: TMC छोड़ BJP में आए 3 नेताओं को मिला राज्यसभा टिकट, संसद में बढ़ेगा NDA का दम
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक को भाजपा ने तत्काल प्रभाव से राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

गुरुवार को कोलकाता में बीजेपी की सदस्यता लेने के कुछ ही घंटों बाद इन नेताओं को यह बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई। जिस सीट से इन्होंने इस्तीफा दिया था, अब बीजेपी उन्हीं सीटों पर इन्हें वापस संसद भेजने की तैयारी में है।

BJP का बड़ा राजनीतिक दांव

इन तीनों नेताओं को टिकट देकर बीजेपी ने दो संदेश दिए हैं। पहला यह कि पार्टी में शामिल होने वाले वरिष्ठ नेताओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। दूसरा, यह टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है, क्योंकि जिन नेताओं ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाकर पार्टी छोड़ी, वे अब बीजेपी के सिंबल पर संसद में दस्तक देंगे।

विधानसभा में बीजेपी का दबदबा

पश्चिम बंगाल विधानसभा के मौजूदा गणित पर नजर डालें तो बीजेपी बेहद मजबूत स्थिति में है। सदन में बीजेपी के पास 208 विधायक हैं। राज्यसभा उपचुनाव के नियमों के अनुसार, प्रत्येक सीट जीतने के लिए करीब 70 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है।

आंकड़ों के लिहाज से बीजेपी के लिए तीनों सीटें आसानी से निकालना तय माना जा रहा है। बीजेपी को अपने तीनों उम्मीदवारों के लिए आवश्यक संख्या बल जुटाने में कोई परेशानी नहीं होगी।

बिखरती TMC की मुश्किलें बढ़ीं

टीएमसी के लिए यह उपचुनाव किसी बुरे सपने जैसा है। पार्टी के पास अभी भी करीब 80 विधायक हैं, लेकिन आंतरिक कलह ने पार्टी की कमर तोड़ दी है। टीएमसी विधायक दल स्पष्ट रूप से दो धड़ों में बंट चुका है।

एक गुट ममता बनर्जी के साथ है, तो दूसरा बागी गुट ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में सक्रिय है। दोनों ही गुट चुनाव आयोग में असली पार्टी होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में एकजुट होकर वोटिंग की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है, जिससे टीएमसी का इन सीटों को बचा पाना नामुमकिन दिख रहा है।

राज्यसभा में बढ़ेगी NDA की ताकत

इन तीन सीटों पर जीत दर्ज करते ही राज्यसभा में बीजेपी की सदस्य संख्या बढ़कर 117 हो जाएगी, जबकि एनडीए का कुल आंकड़ा 145 तक पहुंच जाएगा।

हालांकि, यह संख्या मोदी सरकार को जादुई आंकड़े (162 सीटें) तक तो नहीं पहुंचाएगी, लेकिन इससे सरकार के लिए संसद में महत्वपूर्ण बिल पास कराना पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा। वहीं, इन सीटों को गंवाने के बाद टीएमसी के पास राज्यसभा में केवल 9 सांसद ही शेष रह जाएंगे।

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