दिल्ली से पटना का सफर अब केवल 5 घंटे में: हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन से बदलेगी बिहार की सूरत
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भारतीय रेलवे अपने इतिहास के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। दिल्ली से पटना और आगे सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल नेटवर्क बिछाने की योजना तैयार है। यह कॉरिडोर उत्तर और पूर्वी भारत के परिवहन तंत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

15 घंटे का सफर, मात्र 5 घंटे में

वर्तमान में दिल्ली से पटना की दूरी तय करने में सुपरफास्ट ट्रेनों को 12 से 14 घंटे का समय लगता है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, नई बुलेट ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद यह सफर घटकर महज 5 घंटे 41 मिनट का हो जाएगा। दिल्ली से सिलीगुड़ी तक का लंबा सफर भी मात्र 6 घंटे में सिमट जाएगा।

बिहार के इन शहरों को मिलेगा फायदा

यह प्रोजेक्ट बिहार के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती सर्वे में बिहार में 5 से 6 स्टेशनों को चिन्हित किया गया है। ट्रेन बक्सर, आरा और पटना से होते हुए बख्तियारपुर, बेगूसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार तक जाएगी। इसके बाद पूर्णिया और किशनगंज के रास्ते यह सीधे सिलीगुड़ी पहुंचेगी।

4 राज्यों का पावर गेम

यह हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ेगा। यूपी में यह नोएडा, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, लखनऊ, अयोध्या और न्यू भदोही जैसे प्रमुख केंद्रों से गुजरेगा। यह रूट न केवल यात्रियों को जोड़ेगा, बल्कि इन राज्यों के औद्योगिक विकास को भी नई गति देगा।

जापान की शिन्कान्सेन तकनीक का जलवा

इस प्रोजेक्ट में जापान की विश्वप्रसिद्ध शिन्कान्सेन तकनीक का इस्तेमाल होगा। ट्रेन की डिजाइनिंग स्पीड 350 किमी प्रति घंटा होगी, जबकि यह 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। खास बैलेस्टलेस ट्रैक (बिना गिट्टी वाले ट्रैक) के कारण इतनी रफ्तार में भी यात्रियों को झटके महसूस नहीं होंगे।

अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

विशेषज्ञों का मानना है कि बुलेट ट्रेन गुजरने वाले क्षेत्रों में रियल एस्टेट, औद्योगिक हब और लॉजिस्टिक्स सेंटर तेजी से विकसित होंगे। बिहार में अकेले बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जो राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे।

कब तक शुरू होगा काम?

फिलहाल दिल्ली-वाराणसी खंड की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार है। वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी रूट के लिए हवाई सर्वे और फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर काम तेजी से चल रहा है। रेल जानकारों का मानना है कि इस कॉरिडोर पर जमीनी स्तर पर काम 2030 तक शुरू हो सकता है। यदि यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा हुआ, तो यह भारत की आधुनिक परिवहन व्यवस्था मील का पत्थर साबित होगा।

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