शरद पवार का NDA में स्वागत? केंद्रीय मंत्री के दावे ने महाराष्ट्र की राजनीति में मचाई हलचल
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महाराष्ट्र की राजनीति में उठा-पटक का दौर जारी है। इस बीच, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के एक बयान ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। आठवले ने दावा किया है कि NCP (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार के लिए NDA के दरवाजे हमेशा खुले हैं।

2014 में NDA में होते तो राष्ट्रपति बन जाते केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि शरद पवार को कई बार NDA में शामिल होने का न्योता दिया गया है। आठवले ने कहा, शरद पवार महाराष्ट्र के अत्यंत सम्मानित नेता हैं। अगर वह 2014 में ही NDA का हिस्सा बन गए होते, तो आज वे भारत के राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद पर आसीन हो सकते थे।

गद्दार नहीं, उद्धव ठाकरे हैं जनादेश के धोखेबाज एकनाथ शिंदे और शरद पवार की हालिया मुलाकात पर संजय राउत की गद्दार वाली टिप्पणी पर भी आठवले ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, एकनाथ शिंदे को गद्दार कहना सरासर गलत है। असल में, 2019 में उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और NCP के साथ मिलकर जनादेश के साथ धोखा किया था।

शिंदे-पवार मुलाकात से बढ़ी तनातनी हाल ही में शरद पवार ने विधान भवन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय जाकर उनसे मुलाकात की। इसे पवार ने शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) में इसे लेकर खलबली मच गई है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने इस मुलाकात पर कड़ी आपत्ति जताई है।

संजय राउत ने उठाए सवाल संजय राउत ने कहा कि पवार जैसे वरिष्ठ नेता का शिंदे के कार्यालय में बैठक करना उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। राउत ने तंज कसते हुए कहा, क्या पूरी विधानसभा में जगह खाली नहीं थी, जो उन्हें शिंदे के चैंबर में ही बैठक करनी पड़ी? यह गद्दारों को महिमामंडित करने जैसा है।

NCP का पलटवार: राजनीति भावनाओं से नहीं, गणित से चलती है राउत की टिप्पणी पर NCP के प्रवक्ताओं ने कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में शिष्टाचार और संवैधानिक पदों का सम्मान जरूरी है। मातेले ने कहा, शिंदे एक संवैधानिक पद पर हैं और पवार राज्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए उनसे मिले। अगर एक मुलाकात से MVA की नींव हिल रही है, तो इसका मतलब है कि विपक्ष का गठबंधन बेहद कमजोर है।

क्या पवार बदलेंगे पाला? आठवले के बयान और शिंदे-पवार की मुलाकात ने उन अटकलों को हवा दे दी है जो पिछले काफी समय से महाराष्ट्र में चल रही हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से शरद पवार ने अभी तक इन संभावनाओं पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन MVA के भीतर मची यह रार भविष्य में बड़े राजनीतिक बदलावों के संकेत दे रही है।

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