मैं अकेला चोर नहीं, सिस्टम में सब शामिल : निलंबित सब-इंजीनियर का वायरल वीडियो मचा रहा हड़कंप
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मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। मझगवां जनपद पंचायत के निलंबित सब-इंजीनियर सतीश समेले ने निलंबन के बाद कैमरे पर आकर कमीशनखोरी के उस अंधेरे सच को बयां किया है, जिसे अब तक केवल दबी जुबान में चर्चा किया जाता था।

कौन माई का लाल है जो कमीशन नहीं खाता? सतीश समेले ने बेबाकी से कहा, खून में जोश चाहिए बगावत के लिए, मैं अकेला चोर थोड़ी हूं। कौन माई का लाल है जो कमीशन नहीं लेता? अगर कोई नहीं लेता, तो हनुमान जी के सामने अपने बेटे की कसम खाए, तब मैं मानूंगा। उन्होंने दावा किया कि जनपद पंचायत से लेकर भोपाल तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।

कमीशन का गणित और वसूली का चक्र समेले ने इस कथित कमीशनखोरी का एक विस्तृत चार्ट भी बताया। उनके अनुसार, निर्माण कार्यों में कमीशन का बँटवारा इस तरह होता है:

उनका कहना है कि सब-इंजीनियर केवल वसूली एजेंट बनकर रह गए हैं और उन्हें व्यवस्था के तहत बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

अधिकारियों तक पहुँचते हैं सूटकेस निलंबित इंजीनियर ने आरोप लगाया कि जिले से लेकर संभाग और भोपाल तक से आने वाले निरीक्षण अधिकारियों के लिए सूटकेस भेजे जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इन तमाम दावों के पुख्ता सबूत हैं, जिन्हें वे हाई कोर्ट में पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरे सिस्टम के भ्रष्टाचार को छिपाने का एक तरीका है।

बंदूक लेकर निरीक्षण करने पर हुई थी कार्रवाई सतीश समेले मझगवां के हिरौंदी ग्राम पंचायत में संविदा उपयंत्री के पद पर थे। उन पर आरोप था कि वे निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान साथ में बंदूक लेकर चलते थे, जिससे ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों में दहशत थी। शिकायतों के बाद जिला पंचायत सीईओ ने पहले उन्हें नोटिस दिया और जवाब संतोषजनक न होने पर अब उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई है।

अब आगे क्या? सतीश समेले के इस खुलासे के बाद अब प्रशासनिक अमला बैकफुट पर दिख रहा है। हालांकि विभाग ने उन पर वित्तीय अनियमितता और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए हैं, लेकिन समेले के बयानों ने सरकारी निर्माण कार्यों में चल रही कमीशन की प्रथा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या हाई कोर्ट में वे वाकई कोई सबूत पेश कर पाएंगे या यह केवल निलंबन की हताशा है।

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