मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित नेतृत्व की लड़ाई को तेज कर दिया है। इस मामले में जहां भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने ही अंदाज में उन पर कड़ा प्रहार किया है।
क्या है पूरा मामला? मेरठ में दलित युवती ललिता गौतम की हत्या के बाद भीम आर्मी ने जोरदार प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें मेरठ एसएसपी द्वारा प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल हुआ। चंद्रशेखर आजाद ने पीड़ित परिवार से मिलने और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर मेरठ कूच किया। रास्ते में पुलिस से हुई तीखी बहस के बाद उन्हें शहर में जाने की अनुमति मिली।
मायावती का तीखा हमला लंबे समय बाद सक्रिय हुईं मायावती ने सीधे तौर पर चंद्रशेखर का नाम लिए बिना उन्हें दलितों का दुश्मन बताया। मायावती ने कहा, कुछ नेता वोटों की खातिर घड़ियाली आंसू बहाने दलितों के बीच पहुंच जाते हैं। ये लोग भड़काकर निकल जाते हैं और बाद में गरीब दलित कानूनी पचड़ों में फंसकर जेल जाने को मजबूर होता है। उन्होंने दलितों को सलाह दी कि वे किसी के बहकावे में न आएं और केवल कानून के दायरे में रहकर अपनी आवाज उठाएं।
चंद्रशेखर का पलटवार मायावती के बयान पर चंद्रशेखर आजाद ने भी तल्खी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, अगर मायावती जी को वाकई दलितों के दर्द का एहसास होता, तो वे घर में बैठकर बयान देने के बजाय खुद मेरठ आतीं और पीड़ित परिवार से मिलतीं। चंद्रशेखर ने कहा कि वे हमेशा मायावती का सम्मान करते आए हैं, लेकिन उनके इस निजी हमले से उन्हें निराशा हुई है।
सियासी रोटी सेंकने का आरोप इस पूरे विवाद में समाजवादी पार्टी भी कूद पड़ी है। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि वे वही बोलती हैं जो बीजेपी चाहती है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मायावती और चंद्रशेखर के बीच की यह खींचतान दलित वोट बैंक पर अपनी पकड़ बनाए रखने की एक कवायद है।
दलित राजनीति की नई दिशा मायावती की यह चेतावनी कि सत्ता की चाभी बसपा को सौंपें , उनकी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की हताशा को दर्शाती है। वहीं, चंद्रशेखर का सड़कों पर उतरना यह संकेत देता है कि दलित युवाओं का एक बड़ा वर्ग अब पारंपरिक राजनीति से हटकर आक्रामक नेतृत्व की ओर आकर्षित हो रहा है।
फिलहाल, ललिता हत्याकांड का न्याय तो कानूनी प्रक्रिया से होगा, लेकिन इस घटना ने यूपी के दलित वोट बैंक पर वर्चस्व की लड़ाई को और धारदार बना दिया है।
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— India TV (@indiatvnews) July 10, 2026
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