दशकों पुराने जल विवादों का अंत: डबल इंजन की रफ्तार से सुलझ रही हैं राज्यों की समस्याएं
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नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने राज्यों के बीच दशकों से लंबित जल विवादों को सुलझाने में बड़ी सफलता हासिल की है। संवाद से समाधान के मंत्र पर चलते हुए, पिछले एक महीने में कई ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगी है, जिससे वर्षों पुरानी कड़वाहट खत्म हो रही है।

हरियाणा-राजस्थान के बीच 30 साल पुराना विवाद खत्म 29 जून को गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हरियाणा और राजस्थान ने यमुना जल परियोजना को लेकर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे राजस्थान के शेखावाटी और हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में यमुना के सरप्लस पानी के उपयोग का रास्ता साफ हो गया है।

नर्मदा परियोजना पर वन-टाइम सेटलमेंट 7 जुलाई को मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने साथ आकर एक बड़ी मिसाल पेश की। सरदार सरोवर और इंदिरा सागर प्रोजेक्ट से जुड़े वित्तीय और पुनर्वास संबंधी विवादों को वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए हमेशा के लिए सुलझा लिया गया है। इससे विस्थापितों के मुआवजे और परियोजना के बकाया कर्ज का गतिरोध समाप्त हो गया है।

किशाऊ बांध परियोजना पर सहमति सूत्रों के अनुसार, 15 जुलाई को छह राज्यों (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी, हरियाणा और राजस्थान) के बीच किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर समझौता होने की पूरी संभावना है। टोंस नदी पर बनने वाला यह बांध भविष्य में इन राज्यों की बिजली और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा।

बिहार-झारखंड के बीच सोन नदी विवाद सुलझा एक बड़ा घटनाक्रम सोन नदी जल बंटवारे को लेकर देखने को मिला है। अब 7.75 एमएमएफ पानी में से बिहार को 5.75 और झारखंड को 2 एमएमएफ पानी मिलेगा। इस समझौते से इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का निर्माण कार्य अब तेजी से आगे बढ़ सकेगा, जिसका सीधा लाभ दोनों राज्यों के किसानों को होगा।

क्या अब कावेरी और कृष्णा विवाद की बारी है? जहां एक ओर केंद्र सरकार कृष्णा नदी विवाद सुलझाने के लिए न्यायाधिकरण के जरिए सक्रिय है, वहीं कावेरी जल विवाद जैसे पुराने मुद्दों को भी हल करने की कवायद शुरू हो गई है। हालांकि, विपक्षी शासित राज्यों के साथ तालमेल बिठाने में अभी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन टीम इंडिया की भावना के साथ केंद्र सरकार इन जटिल समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

इन ऐतिहासिक समझौतों का सबसे बड़ा परिणाम यह है कि कानूनी लड़ाइयों में फंसा पानी अब सीधे देश के खेतों और नागरिकों के घरों तक पहुँच सकेगा। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्यों के बीच यह बढ़ता हुआ आपसी सहयोग एक सकारात्मक संकेत है।

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