दुनिया का सबसे बड़ा मिलिट्री हेडक्वार्टर अब मिस्र में बनकर तैयार हो गया है। द ऑक्टागन नाम के इस विशाल कॉम्प्लेक्स ने आकार और तकनीक के मामले में अमेरिका के पेंटागन को भी पीछे छोड़ दिया है।
द ऑक्टागन का विस्तार 22,000 एकड़ में फैला हुआ है। तुलना करें तो अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय पेंटागन महज 41 एकड़ के परिसर में स्थित है। आकार के लिहाज से मिस्र का यह नया मुख्यालय पेंटागन से लगभग 750 गुना बड़ा है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा स्ट्रैटेजिक कमांड सेंटर बनाता है।
इसका डिजाइन प्राचीन मिस्र के पिरामिडों और इस्लामिक ज्यामितीय कला से प्रेरित है। लेकिन इसके भीतर की तकनीक पूरी तरह से भविष्यवादी है। यह मुख्यालय C4ISR सिस्टम से लैस है, जो कमांड, कंट्रोल, संचार, कंप्यूटर, खुफिया जानकारी और निगरानी को एक एकल नेटवर्क में जोड़ता है।
इस पूरे कॉम्प्लेक्स को 13 रणनीतिक और सप्लाई जोन में बांटा गया है। इसमें जमीन, जल और वायु सेना को एक साथ जोड़ा गया है। सब कुछ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर से नियंत्रित है, ताकि युद्ध या प्राकृतिक आपदा के समय पलक झपकते ही सटीक और तेज फैसले लिए जा सकें। इसके अलावा, इसकी साइबर सिक्योरिटी इतनी अभेद्य बनाई गई है कि हैकिंग या साइबर हमले की कोई गुंजाइश नहीं है।
मिस्र इस मुख्यालय को काहिरा से 45 किलोमीटर दूर नए शहर में बना रहा है। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज को काहिरा की भीड़भाड़ और 2011 जैसी संभावित नागरिक अशांति से दूर सुरक्षित रखना है, ताकि आपातकाल में भी सैन्य संचार और संचालन निर्बाध रूप से चलता रहे।
मिस्र इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिसके चलते इतने बड़े प्रोजेक्ट पर हो रहे भारी खर्च की आलोचना भी हो रही है। हालांकि, रणनीतिकारों का मानना है कि सिनाई में आतंकवाद, लाल सागर में अस्थिरता और लीबिया-सूडान की सीमाओं पर बढ़ते तनाव के बीच यह मुख्यालय मिस्र की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
मिस्र ने अभी तक इस पर हुए खर्च का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह साफ है कि आने वाले समय में द ऑक्टागन वैश्विक रक्षा राजनीति का एक प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।
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— Zee News (@ZeeNews) July 6, 2026
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