देश में नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते अपराध: श्रीगंगानगर से पश्चिम बंगाल तक दहलाने वाली घटनाएं
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देशभर में नाबालिग बच्चियों के साथ अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या की घटनाओं में खतरनाक उछाल आया है। राजस्थान, पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक, मासूम बच्चियां दरिंदों का शिकार हो रही हैं। इन मामलों ने कानून-व्यवस्था और समाज की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

श्रीगंगानगर: 13 साल की किशोरी 1000 रुपये में बेची गई

राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग के साथ हुई बर्बरता ने देश को झकझोर दिया है। आरोप है कि एक ई-रिक्शा चालक ने किशोरी को महज 1000 रुपये में होटल मालिकों को बेच दिया। 18 से 23 जून के बीच 32 लोगों ने उसे अलग-अलग होटलों में बंधक बनाकर उसका यौन शोषण किया। विरोध करने पर उसे शराब पिलाकर प्रताड़ित किया जाता था। पुलिस ने अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और अपराध में शामिल तीन होटलों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया है।

पश्चिम बंगाल: 12 साल की बच्ची का क्षत-विक्षत शव

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। 5 जुलाई को एक 12 वर्षीय लापता किशोरी का तालाब से क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। परिवार का आरोप है कि अपहरण के बाद बच्ची के साथ गैंगरेप कर हत्या की गई। इस घटना से भड़की स्थानीय भीड़ ने आरोपी का सहयोगी होने के शक में एक व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।

हरदोई मामला: सोशल मीडिया पर फैलाया गया भ्रामक वीडियो

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक लड़की को अस्पताल में बयान देते दिखाया गया। इसे श्रीगंगानगर की घटना से जोड़कर पेश किया गया, जिसे उत्तर प्रदेश की हरदोई पुलिस ने सिरे से खारिज किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि हरदोई का मामला अलग है, जिसमें 13 वर्षीय किशोरी का अपहरण हुआ था। पुलिस की सक्रियता से लड़की सुरक्षित वापस आ गई है और आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

बढ़ते अपराध और एनसीआरबी (NCRB) के डरावने आंकड़े

नाबालिगों के खिलाफ अपराधों की सूची बढ़ती ही जा रही है। छत्तीसगढ़ में मुंहबोले जीजा द्वारा 12 साल की अनाथ बच्ची से रेप, दिल्ली में 10 साल की बच्ची की हत्या और जौनपुर में 4 साल की मासूम की गला घोंटकर हत्या जैसी खबरें समाज की भयावह स्थिति को दर्शाती हैं।

NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत 69,191 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा अपहरण के 70,370 और तस्करी के 1,600 से अधिक मामले सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पुलिसिया कार्रवाई न होना और आरोपियों का बेखौफ होना इन घटनाओं का मुख्य कारण है।

समय की मांग है कि इन जघन्य मामलों को फास्ट ट्रैक अदालतों में चलाकर दोषियों को कठोरतम सजा दी जाए, ताकि मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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