अयोध्या इस वक्त एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक सस्पेंस के केंद्र में है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज होने वाली बैठक ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे के बयानों और कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच यह सवाल सबसे बड़ा है—क्या महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा की छुट्टी होने वाली है?
मणि राम छावनी में आयोजित यह बैठक कोई सामान्य सालाना बैठक नहीं है, बल्कि ट्रस्ट की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य एजेंडा चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर अंतिम निर्णय लेना है। इसके साथ ही, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट पर भी मंथन होगा, जो चंदे से जुड़े विवादों की जांच कर रही है।
चंपत राय के हटने की अटकलों के बीच, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के तीन शीर्ष नेताओं का अचानक अयोध्या पहुंचना किसी बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।
यदि चंपत राय और अनिल मिश्रा अपने पद छोड़ते हैं, तो ट्रस्ट केवल नई नियुक्तियों तक सीमित नहीं रहेगा। सूत्रों के अनुसार, मंदिर प्रबंधन को प्रोफेशनल और पारदर्शी बनाने के लिए एक नए CEO की नियुक्ति पर भी मोहर लग सकती है।
संभावित बदलावों पर एक नजर:
भले ही आधिकारिक तौर पर ट्रस्ट या VHP ने अभी तक किसी बदलाव की पुष्टि नहीं की है, लेकिन शीर्ष नेताओं की सक्रियता ने साफ कर दिया है कि पर्दे के पीछे स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है। अयोध्या की बंद कमरों वाली इस बैठक के नतीजे न केवल राम मंदिर ट्रस्ट का चेहरा बदलेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि देश के इस सबसे प्रमुख संस्थान का भविष्य किस दिशा में जाएगा। कुछ घंटों में तस्वीर साफ हो जाएगी।
*#WATCH | Ayodhya, UP: On the meeting of Ram Temple Trust over the alleged temple donations embezzlement case, Swami Govind Dev Giri Ji Maharaj, Treasurer of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust, and founder of the Geeta Pariwar, says, I am not going to say anything… pic.twitter.com/dYKRCUSdUw
— ANI (@ANI) July 6, 2026
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