क्या विदा होंगे चंपत राय? अयोध्या पहुंचे VHP के 3 दिग्गज, राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े बदलाव की आहट
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अयोध्या इस वक्त एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक सस्पेंस के केंद्र में है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज होने वाली बैठक ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे के बयानों और कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच यह सवाल सबसे बड़ा है—क्या महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा की छुट्टी होने वाली है?

अग्निपरीक्षा का दिन और मेज पर इस्तीफे

मणि राम छावनी में आयोजित यह बैठक कोई सामान्य सालाना बैठक नहीं है, बल्कि ट्रस्ट की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य एजेंडा चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर अंतिम निर्णय लेना है। इसके साथ ही, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट पर भी मंथन होगा, जो चंदे से जुड़े विवादों की जांच कर रही है।

VHP के तीन संकटमोचक की सीक्रेट एंट्री

चंपत राय के हटने की अटकलों के बीच, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के तीन शीर्ष नेताओं का अचानक अयोध्या पहुंचना किसी बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

  1. बजरंग लाल बागरा: ये रेस में सबसे आगे हैं। VHP के केंद्रीय महासचिव बागरा एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। नाल्को (NALCO) जैसी बड़ी कंपनियों में CFO रह चुके बागरा को वित्तीय पारदर्शिता लाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है।
  2. नीरज दौनेरिया: बजरंग दल के नेशनल कन्वीनर के रूप में अपनी धाक जमा चुके दौनेरिया को संगठन में आक्रामक और युवा नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है।
  3. वेंकट कोटेश्वर राव: VHP के सेंट्रल जॉइंट जनरल सेक्रेटरी के रूप में दिल्ली से पूरे देश का कामकाज देखने वाले राव संगठन के सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक हैं।

प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव तय?

यदि चंपत राय और अनिल मिश्रा अपने पद छोड़ते हैं, तो ट्रस्ट केवल नई नियुक्तियों तक सीमित नहीं रहेगा। सूत्रों के अनुसार, मंदिर प्रबंधन को प्रोफेशनल और पारदर्शी बनाने के लिए एक नए CEO की नियुक्ति पर भी मोहर लग सकती है।

संभावित बदलावों पर एक नजर:

सबकी नजरें अयोध्या पर

भले ही आधिकारिक तौर पर ट्रस्ट या VHP ने अभी तक किसी बदलाव की पुष्टि नहीं की है, लेकिन शीर्ष नेताओं की सक्रियता ने साफ कर दिया है कि पर्दे के पीछे स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है। अयोध्या की बंद कमरों वाली इस बैठक के नतीजे न केवल राम मंदिर ट्रस्ट का चेहरा बदलेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि देश के इस सबसे प्रमुख संस्थान का भविष्य किस दिशा में जाएगा। कुछ घंटों में तस्वीर साफ हो जाएगी।

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