पाकिस्तान और चीन की बढ़ी धड़कनें: इंडोनेशिया के साथ भारत की ब्रह्मोस कूटनीति का बिगुल!
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार से अपने तीन देशों के महत्वपूर्ण दौरे की शुरुआत कर रहे हैं। इस यात्रा का पहला पड़ाव दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश इंडोनेशिया है। पीएम मोदी की यह चौथी इंडोनेशिया यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाली है।

पाकिस्तान की बेचैनी, चीन की चिंता यह दौरा भारत के दो पड़ोसियों के लिए सिरदर्द बन गया है। पाकिस्तान खुद को इस्लामी जगत का अगुवा मानता है, इसलिए इंडोनेशिया के साथ भारत की बढ़ती प्रगाढ़ता उसे खटक रही है। वहीं, चीन के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक चुनौती है। मलक्का स्ट्रेट, जहाँ से चीन का अधिकांश समुद्री व्यापार गुजरता है, वहां भारत का प्रभाव चीन के लिए किसी खतरे से कम नहीं है।

ब्रह्मोस मिसाइल से होगा रक्षा संबंधों का विस्तार रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की बिक्री को लेकर बड़ी घोषणा हो सकती है। रक्षा, शिक्षा, व्यापार और कृषि के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच संबंधों को और अधिक औपचारिक और गहरा बनाने पर जोर दिया जाएगा।

समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत की रणनीति भारत और इंडोनेशिया के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को लेकर विजन पहले से ही स्पष्ट है। भारत अब इंडोनेशियाई सैनिकों को एनडीए और डीएसएससी में प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, हिंद महासागर में समुद्री सतर्कता बढ़ाने के लिए दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

क्रिटिकल मिनरल: भविष्य की ऊर्जा और तकनीक इंडोनेशिया के पास दुनिया का करीब 21 फीसदी निकिल रिजर्व है। साथ ही, कॉपर, बॉक्साइट और टिन के उत्पादन में भी यह अग्रणी है। भारत की विकसित भारत 2047 और इंडोनेशिया की ईमास 2045 योजनाओं के तहत, दोनों देश एक-दूसरे के क्रिटिकल मिनरल और संसाधनों का सही इस्तेमाल करने पर सहमति बना सकते हैं।

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से चीन पर लगाम चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारत ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर काम तेज कर दिया है। अंडमान एंड निकोबार कमांड की सक्रियता से मलक्का स्ट्रेट पर भारत की सीधी नजर है। यह रणनीतिक बढ़त चीन के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि मलक्का का रास्ता चीन की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन माना जाता है।

आसियान देशों में इंडोनेशिया पहले ही भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों के बीच 24.78 बिलियन डॉलर का व्यापारिक रिश्ता यह साबित करता है कि आने वाले समय में भारत और इंडोनेशिया की साझेदारी पूरे क्षेत्र का गेम चेंजर साबित होगी।

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