राजनीति में अक्सर कब कौन सा मुद्दा सोशल मीडिया पर ट्रेंड बन जाए, यह कहना मुश्किल है। हाल ही में लखनऊ में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के एक बयान पर आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा- आप कौन हैं? । बस फिर क्या था, इस एक सवाल ने इंटरनेट पर एक ऐसी बहस छेड़ दी, जिसमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी शामिल होना पड़ा।
केजरीवाल के सवाल से बढ़ा विवाद घटना की शुरुआत लखनऊ के एक कार्यक्रम से हुई, जहां बीजेपी के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल पर सनातन धर्म को लेकर तीखे हमले किए। नितिन ने कहा कि जनता अपनी विरासत का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। इस पर केजरीवाल ने रीपोस्ट करते हुए पूछा, आप कौन हैं? । केजरीवाल का यह अंदाज बीजेपी नेताओं और समर्थकों को रास नहीं आया और इंटरनेट पर नितिन नबीन के जीवन और उनके सफर को लेकर चर्चाओं का सैलाब आ गया।
पत्रकार दोस्त की भावुक पोस्ट और PM की तारीफ इस विवाद के बीच नितिन नबीन के कॉलेज के दिनों के दोस्त और पत्रकार पीयूष पद्माकर ने एक भावुक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने नितिन के संघर्षों को बयां किया। उन्होंने बताया कि कैसे साल 1998 में दिल्ली में पढ़ाई के दौरान नितिन ने विधायक का बेटा होने के बावजूद बेहद साधारण जीवन जिया। पीयूष के मुताबिक, वे पैसे बचाने के लिए 20 रुपये की थाली को आपस में आधा-आधा बांटकर खाते थे और बस के धक्के खाते थे ताकि ऑटो का किराया बच सके।
जब महंगे फ्लैट का ऑफर ठुकराया पीयूष ने एक पुराना किस्सा साझा किया जब वे दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में कमरा ढूंढ रहे थे। प्रॉपर्टी डीलर को जब पता चला कि नितिन के पिता बिहार में विधायक हैं, तो उसने महंगे फ्लैट दिखाने शुरू कर दिए। लेकिन नितिन ने यह कहकर मना कर दिया कि उनका बजट महीने का महज 2000 रुपये है और पिता से ज्यादा पैसे लेने की उनकी परंपरा नहीं है। उन्होंने नौकर रखने के बजाय खुद बर्तन धोना और झाड़ू-पोछा करना पसंद किया।
PM मोदी का संदेश: सादगी ही ताकत है पत्रकार दोस्त की इस कहानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी ध्यान खींचा। पीएम मोदी ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, नितिन नबीन की यह सरलता, सादगी और जमीनी जुड़ाव हर पार्टी कार्यकर्ता के लिए गर्व की बात है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 45 साल की उम्र में बीजेपी जैसे बड़े संगठन की कमान संभालना नितिन नबीन की इसी जमीनी हकीकत और लोगों के बीच अटूट भरोसा बनाने की कला का परिणाम है। इस पूरे प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में कौन है यह नाम से नहीं, बल्कि कर्म और सादगी से तय होता है।
*ये सादगी और सरलता हर भाजपा कार्यकर्ता के लिए गर्व की बात है।@NitinNabin pic.twitter.com/uT0jRF2twJ
— Narendra Modi (@narendramodi) July 6, 2026
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