ट्रंप के 3 फोन कॉल और फीफा का यू-टर्न: 64 साल बाद वर्ल्ड कप में फिर दोहराया गया इतिहास!
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फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका के स्टार स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड विवाद तूल पकड़ चुका है। बोस्निया हर्जेगोविना के खिलाफ मैच में बालोगुन को खतरनाक टैकल के लिए मैदान से बाहर किया गया था, लेकिन फीफा ने मैच से ठीक पहले अपना फैसला पलट दिया है।

क्या हुआ था मैदान पर?

नॉकआउट मुकाबले के दौरान बालोगुन का पैर बोस्नियाई डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच के टखने पर लगा था। VAR की मदद लेने के बाद रेफरी राफेल क्लॉस ने उन्हें सीधा रेड कार्ड दिखाया। नियमों के मुताबिक, बालोगुन का अगले मैच (बेल्जियम के खिलाफ) से बाहर होना तय था।

आर्टिकल 27 का इस्तेमाल और ट्रंप की एंट्री

फीफा ने अचानक अपना रुख बदलते हुए बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ खेलने की अनुमति दे दी। विवाद तब गहराया जब रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को तीन बार फोन किया था। हालांकि, व्हाइट हाउस ने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है, लेकिन फैसले के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस कदम को सही और न्यायपूर्ण बताया।

फीफा ने कैसे बदली बाजी?

फीफा ने अपने नियमों के आर्टिकल 27 का सहारा लिया है। यह नियम न्यायिक समिति को अनुशासनात्मक सजा में बदलाव करने का विशेष अधिकार देता है। हालांकि, रेड कार्ड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि एक साल के प्रोबेशन पर रखा गया है। यदि बालोगुन ने फिर ऐसी गलती की, तो उन पर तुरंत एक मैच का प्रतिबंध लग जाएगा।

इतिहास में भी हुई थी ऐसी मेहरबानी

यह पहली बार नहीं है जब फीफा ने सजा कम की हो। 1962 वर्ल्ड कप में ब्राजील के दिग्गज गैरिंचा को रेड कार्ड मिला था, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपतियों की अपील के बाद उन्हें फाइनल खेलने दिया गया था। इस बार भी कुछ वैसा ही होता दिख रहा है, जिससे फुटबॉल जगत में बहस छिड़ गई है।

बेल्जियम क्यों आगबबूला है?

रॉयल बेल्जियन फुटबॉल एसोसिएशन ने इस फैसले को खेल की निष्पक्षता का अपमान बताया है। बेल्जियम का तर्क है कि अगर रेड कार्ड के बाद भी खिलाड़ी को खेलने की छूट दी जाएगी, तो भविष्य में खेल के नियम बेमानी हो जाएंगे। बेल्जियम इस मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई के विकल्प तलाश रहा है।

अब सबकी नजरें कल सुबह 5:30 बजे होने वाले अमेरिका बनाम बेल्जियम के मुकाबले पर हैं। यदि अमेरिका जीतता है, तो यह विवाद लंबे समय तक फीफा के संचालन और VAR के इस्तेमाल पर बड़े सवाल खड़े करेगा।

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