पीएम मोदी की इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया यात्रा: क्या है भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और क्यों है यह गेम-चेंजर?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा पर रवाना हो चुके हैं। वे इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य केंद्र भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को नई गति देना है। आइए जानते हैं कि यह नीति क्या है और भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है।

लुक ईस्ट से एक्ट ईस्ट तक का सफर

भारत ने 1991 में आर्थिक सुधारों के दौर में लुक ईस्ट पॉलिसी शुरू की थी। 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे नया रूप देते हुए एक्ट ईस्ट पॉलिसी में बदल दिया। इसका उद्देश्य केवल पूर्व की ओर देखना नहीं, बल्कि इन देशों के साथ मिलकर ठोस और सक्रिय परिणाम हासिल करना है।

क्यों बार-बार जिक्र करते हैं पीएम मोदी?

प्रधानमंत्री का मानना है कि भारत का भविष्य एशिया की आर्थिक वृद्धि से गहराई से जुड़ा है। पूर्वी देशों के साथ मजबूत संबंध व्यापार, निवेश और आधुनिक तकनीक के द्वार खोलते हैं। साथ ही, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत करना भारत की वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा है।

व्यापार और पूर्वोत्तर भारत का कायाकल्प

इस नीति का सीधा लाभ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को मिल रहा है। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाओं से पूर्वोत्तर का संपर्क अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ रहा है। बेहतर रेल, सड़क और जल संपर्क से यहां पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय उद्योगों को वैश्विक बाजार मिलेगा।

सुरक्षा और चीन का फैक्टर

हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक में बदलती भू-राजनीति के बीच, भारत अपने मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नीति किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के लिए है। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत एक विश्वसनीय और मजबूत भागीदार के रूप में उभरा है।

कनेक्टिविटी: विकास की रीढ़

एक्ट ईस्ट की सफलता बेहतर कनेक्टिविटी पर टिकी है। डिजिटल, समुद्री और हवाई मार्गों का विस्तार होने से न केवल व्यापारियों को फायदा होगा, बल्कि युवाओं के लिए शिक्षा, शोध और करियर के नए अंतरराष्ट्रीय अवसर भी पैदा होंगे। बौद्ध धर्म और सांस्कृतिक संबंधों के जरिए लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ाना भी इस नीति का अभिन्न अंग है।

चुनौतियां और भविष्य

इतने बड़े स्तर पर काम करने में चुनौतियां भी हैं। कई संपर्क परियोजनाएं भौगोलिक जटिलताओं और प्रशासनिक देरी के कारण धीमी हो जाती हैं। हालांकि, सरकार अब डिजिटल सहयोग और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दे रही है। यदि ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो पूर्वोत्तर भारत वास्तव में एशिया का प्रवेश द्वार बन जाएगा।

पीएम मोदी का यात्रा कार्यक्रम

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