नई दिल्ली। दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म सतलज को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज होने के महज 48 घंटे के भीतर ही इस फिल्म को हटा दिया गया है। फिल्म के अचानक गायब होने से दर्शकों के साथ-साथ फिल्म से जुड़े कलाकारों में भी भारी आक्रोश है और यह मामला अब राजनीतिक गलियारों में तूल पकड़ चुका है।
4 साल का लंबा संघर्ष और 120 कट्स हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। पिछले 4 वर्षों से यह फिल्म सेंसर बोर्ड की मंजूरी के लिए संघर्ष कर रही थी। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को रिलीज करने के लिए 120 कट्स सुझाए थे, जिसे मेकर्स ने मानने से इनकार कर दिया था। आखिरकार, लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई के बाद फिल्म बिना किसी कट के ओटीटी पर आई, लेकिन इसकी आयु बहुत कम रही।
सुखबीर बादल ने बताया इतिहास को छिपाने की कोशिश फिल्म के हटाए जाने पर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार दिया। बादल ने कहा, यह सिर्फ सेंसरशिप नहीं है, बल्कि पंजाब के उस दर्दनाक इतिहास को छिपाने की कोशिश है जिसे जसवंत सिंह खालरा ने अपने बलिदान से उजागर किया था।
दिलजीत दोसांझ का दर्द: फिल्म का हश्र भी खालरा जैसा? अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपना दुख व्यक्त किया। उन्होंने फिल्म का एक क्लिप साझा करते हुए लिखा कि उन्हें पहले से ही अंदेशा था कि फिल्म के साथ वही होगा जो जसवंत सिंह खालरा के साथ हुआ था। दिलजीत ने कहा, मैं अंधेरे को चुनौती दूंगा। इस फिल्म के साथ वही व्यवहार हुआ है जो नायक के साथ हुआ था।
कौन थे जसवंत सिंह खालरा? जसवंत सिंह खालरा एक साहसी मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्होंने पंजाब में तत्कालीन सरकार के दौरान हुई गैर-कानूनी हत्याओं का पर्दाफाश किया था। अपनी जांच में उन्होंने साक्ष्य जुटाए थे कि कैसे पुलिस निर्दोषों को मारकर उन्हें गोपनीय तरीके से दफना रही थी। इस सच को दुनिया के सामने लाने की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी। वे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए और उनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला।
बढ़ती सेंसरशिप पर बड़े सवाल फिल्म सतलज को हटाने के फैसले ने भारत में ओटीटी कंटेंट पर बढ़ती सेंसरशिप को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलाप्रेमी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित फिल्मों को इस तरह दबाना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। फिलहाल, जी5 या सरकारी अधिकारियों की ओर से फिल्म को हटाए जाने के आधिकारिक कारणों पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है।
Shocked and saddened by the arbitrary removal of #Satluj from #ZEE5 in India.
— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) July 5, 2026
A powerful film that courageously unveils Punjab’s painful history and honours the supreme sacrifice of S. Jaswant Singh Ji Khalra cannot be silenced this way.
This is not mere censorship — it is an… pic.twitter.com/yfrkMKYq5D
मुंबई पर मंडराया बड़ा खतरा: अगले 24 घंटे बेहद क्रिटिकल, 20 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मानसून की मार: देशभर में बारिश और बाढ़ का तांडव, 10 बड़े हादसों से थमा जनजीवन
राम मंदिर दानपात्र चोरी पर कोषाध्यक्ष का बड़ा बयान: बोले- यह घटना अत्यंत पीड़ादायक और लज्जित करने वाली
हनुमान जी का अपमान या चुनावी राजनीति? अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर बोला तीखा हमला
दिल्ली वालों के लिए राहत: 12 जुलाई को लगेगी स्पेशल लोक अदालत, पेंडिंग ट्रैफिक चालानों का होगा निपटारा
दिलजीत दोसांझ की सतलुज पर लगा ग्रहण: रिलीज के तीसरे दिन ही प्लेटफॉर्म से हटाई गई फिल्म
जन सुराज का बड़ा दांव: बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर खुद उतरेंगे चुनावी मैदान में
जहर उगल रही हैं ये फेयरनेस क्रीम: महाराष्ट्र में 3 ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर बैन, मरकरी की मात्रा लिमिट से 752 गुना ज्यादा
महिला टी-20 वर्ल्ड कप: चैंपियन ऑस्ट्रेलिया की चांदी, टीम इंडिया और पाकिस्तान की कमाई का पूरा हिसाब
तीसरी बार दूल्हा बने मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान, गौरी स्प्रैट संग रचाई शादी