सिंहस्थ 2028 की महातैयारी: 40 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार हो रहा उज्जैन
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उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में आयोजित एक कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आयोजन की भव्य रूपरेखा पेश की। इस महाकुंभ में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान लगाया गया है, जिसमें से करीब 4 करोड़ लोग अमृत स्नान करेंगे।

मुख्यमंत्री ने साझा किए पुराने अनुभव

कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ से जुड़ी अपनी पुरानी यादें ताजा कीं। उन्होंने 1980 के दशक में एक स्काउट सदस्य के रूप में अपनी सेवा और 1992 में सिंहस्थ समिति के साथ अपने जुड़ाव का जिक्र किया। उन्होंने एक रोचक किस्सा सुनाते हुए कहा कि कैसे एक बार उन्हें उनके ही कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव ही बड़े आयोजनों को सुव्यवस्थित बनाने की महत्वपूर्ण सीख देते हैं।

बुनियादी ढांचे का हो रहा विस्तार

भीड़ के भारी दबाव को देखते हुए उज्जैन में अधोसंरचना विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शहर के प्रवेश मार्गों को चौड़ा किया जा रहा है और क्षिप्रा नदी पर 22 नए पुलों का निर्माण किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन कार्यों से श्रद्धालुओं का आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।

घाटों और आवासीय व्यवस्था पर जोर

लाखों श्रद्धालुओं के स्नान और ठहरने की चुनौती को देखते हुए क्षिप्रा नदी के घाटों को और अधिक मजबूत व व्यवस्थित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक संगठनों और पूर्व अनुभव रखने वाले नागरिकों के सुझावों को भी योजना का हिस्सा बनाया जाएगा। धर्मशालाओं और आवासीय परिसरों में सुविधाओं को अपग्रेड करने का काम युद्धस्तर पर जारी है।

समन्वय से सुधरेगी परिवहन व्यवस्था

सिंहस्थ के दौरान परिवहन तंत्र पर सबसे अधिक दबाव होता है। इसे मैनेज करने के लिए रेलवे और पड़ोसी राज्यों के साथ तालमेल बिठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बेहतर समन्वय ही अव्यवस्थाओं को रोकने का एकमात्र उपाय है।

आर्थिक और वैश्विक केंद्र बनेगा उज्जैन

महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन पहले ही देश का प्रमुख धार्मिक केंद्र बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि सिंहस्थ 2028 न केवल आस्था का आयोजन होगा, बल्कि यह शहर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगा। सरकार का लक्ष्य आधुनिक सुविधाओं और सुचारु प्रबंधन के साथ इसे अब तक का सबसे व्यवस्थित आयोजन बनाना है।

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