राम मंदिर चंदा विवाद: दिग्विजय सिंह ने की चंपत राय की गिरफ्तारी की मांग, कही ये बड़ी बात
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अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला एक बार फिर गरमा गया है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस मामले में मोर्चा खोलते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

चंपत राय की गिरफ्तारी की मांग उज्जैन में मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा कि चंपत राय के खिलाफ न केवल प्राथमिकी (FIR) दर्ज होनी चाहिए, बल्कि उन्हें गिरफ्तार भी किया जाना चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि राम मंदिर के नाम पर हुआ यह कथित घोटाला बर्दाश्त करने योग्य नहीं है।

भाजपा, आरएसएस और विहिप पर कड़े प्रहार दिग्विजय सिंह ने इस विवाद के लिए सीधे तौर पर भाजपा, आरएसएस और विहिप को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्री राम और सनातन धर्म का नाम लेकर चंदा इकट्ठा किया गया, लेकिन उसकी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के बजाय ये संगठन आरोपियों को बचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में धांधली करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

गांव-गांव तक पहुंचेगी कांग्रेस दिग्विजय सिंह ने घोषणा की कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी वार्ड और जिला स्तर पर समितियां बनाकर इस चंदा चोरी के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाएगी। उनका कहना है कि देश के लाखों परिवारों ने अपनी मेहनत की कमाई मंदिर निर्माण के लिए दी थी, इसलिए हर एक पैसे का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला? राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित चंदे और चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला काफी समय से चर्चा में है। पूर्व में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या पुलिस ने चोरी और आपराधिक षड्यंत्र समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।

राजनीतिक गलियारों में गरमाई बहस इस पूरे मामले को सबसे पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सार्वजनिक मंचों पर उठाया था और न्यायिक जांच की मांग की थी। अब दिग्विजय सिंह के ताजा बयान ने भाजपा सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है। मंदिर ट्रस्ट और सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों के बीच, यह मुद्दा आगामी दिनों में एक बड़े राजनीतिक टकराव का केंद्र बनता दिख रहा है।

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