खरवे की खामोशी में दफन आठ मौतों का रहस्य: क्या रामसाय जायसवाल ही है मौत का सौदागर ?
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बलौदाबाजार: कसडोल थाना क्षेत्र के छोटे से गांव खरवे में पिछले चार महीनों से जारी मौतों का सिलसिला अब एक खौफनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। 500 की आबादी वाले इस गांव में आठ लोगों की संदिग्ध मौतों ने न केवल ग्रामीणों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि एक ऐसे शख्स का असली चेहरा बेनकाब किया है, जिसे लोग अब तक अपना शुभचिंतक मानते थे।

धार्मिक चोले के पीछे छिपा दरिंदा रामसाय जायसवाल, जिसकी गिरफ्तारी के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है, कभी गांव की शान हुआ करता था। उसने नदी किनारे हनुमान मंदिर का निर्माण कराया था और उसकी पत्नी के साथ उसकी धार्मिक सक्रियता ने किसी को भी शक करने का मौका नहीं दिया। चचेरे भाई बुधराम जायसवाल की हत्या के बाद भी वह न केवल अंतिम संस्कार में शामिल हुआ, बल्कि उसने धार्मिक परंपराओं के अनुसार सिर भी मुंडवाया। उसका यह सामान्य व्यवहार ही सबसे बड़ा धोखा साबित हुआ।

सुहागा बना मौत का हथियार पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोप है कि रामसाय लोगों को शराब में सुहागा नामक रासायनिक पदार्थ मिलाकर पिलाता था। सामान्यतः सोना-चांदी साफ करने के काम आने वाला यह रसायन श्वास नली को जाम कर हृदय गति रोक देता है। यह तरीका इतना शातिर था कि मौतें बिल्कुल स्वाभाविक लग रही थीं, जिससे आरोपी अब तक बचता रहा।

दफन शवों ने खोला राज इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि यदि मृतकों का अंतिम संस्कार दफनाने की परंपरा से न किया गया होता, तो शायद यह सच कभी बाहर नहीं आता। पुलिस ने जांच के आदेश दिए और शवों को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया। यदि सभी शवों का दाह संस्कार कर दिया गया होता, तो आज आरोपी रामसाय कानून की पकड़ से बहुत दूर होता।

गांव में खौफ और सुरक्षा का पहरा वर्तमान में खरवे गांव के चप्पे-चप्पे पर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के जवानों की तैनाती है। रामसाय का घर आज वीरान पड़ा है और उस पर ताला लटका है। ग्रामीणों के लिए यह यकीन करना मुश्किल है कि जिस व्यक्ति के साथ वे सुख-दुख साझा करते थे, वह अंदर ही अंदर लोगों की हत्या की साजिश रच रहा था।

अगला कदम: फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल पुलिस और ग्रामीणों की निगाहें फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं। आरोपी के चेहरे पर गिरफ्तारी के दौरान पश्चाताप का कोई भाव नहीं था, जो पुलिस के लिए भी जांच का विषय है। छोटी-सी रंजिश के लिए आठ जिंदगियों को मिटाने वाला यह सौदेगर अब सलाखों के पीछे है, लेकिन खरवे गांव के लोग आज भी उस खौफनाक सवाल के जवाब की तलाश में हैं—कि आखिरकार वह कौन सी मानसिक विकृति थी, जिसने एक भक्त को कातिल बना दिया?

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