राम मंदिर चंदा विवाद: FIR से लेकर PMO की सख्ती तक, VHP ने घेरा ट्रस्ट, चंपत राय का इनकार
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संकट में बदल गया है। करोड़ों के दान में गड़बड़ी के आरोपों के बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मोर्चा खोल दिया है, जबकि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की सक्रियता के बाद भी ट्रस्ट ने हिसाब देने से फिलहाल पल्ला झाड़ लिया है।

VHP की चार सख्त मांगें राम मंदिर आंदोलन की अगुआ रही VHP अब इस मामले में कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासन के सामने 4 प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. तुरंत FIR दर्ज हो: कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए।
  2. समयबद्ध जांच: पूरी जांच प्रक्रिया अधिकतम 4 महीने की समय-सीमा में पूरी की जाए।
  3. फास्ट-ट्रैक सुनवाई: मामले को सामान्य अदालतों के बजाय फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए और रोजाना सुनवाई हो।
  4. सख्त सजा: आस्था के प्रतीक के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों को मिसाल के तौर पर कठोर दंड मिले।

PMO की मांग और चंपत राय का ना मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब स्थानीय भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह की शिकायत पर PMO ने राम मंदिर ट्रस्ट से दान, जमीनों की खरीद और वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्योरा तलब किया। हालांकि, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने यह जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया है।

चंपत राय का तर्क है कि चूंकि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) पहले से ही मामले की गहन जांच कर रही है, इसलिए इस दौरान किसी अन्य एजेंसी या प्रशासन को वित्तीय रिकॉर्ड देना संभव नहीं है।

SIT जांच और बढ़ता संदेह योगी सरकार द्वारा गठित SIT, जिसकी अगुवाई लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत कर रहे हैं, मामले की बारीकी से जांच कर रही है। शुरुआती अनुमानों में 7-7.5 करोड़ के गबन की बात कही जा रही थी, लेकिन विपक्षी दलों का दावा है कि यह घोटाला सैकड़ों करोड़ का हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच के घेरे में मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी भी हैं। SIT ने ट्रस्टी समेत अन्य संबंधित व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजरें टेढ़ी कर ली हैं। अब सबकी निगाहें SIT की उस अंतिम गोपनीय रिपोर्ट पर हैं, जो अगले 10-15 दिनों में सरकार को सौंपी जानी है।

क्या अब होगा बड़ा एक्शन? पीएमओ की सक्रियता, VHP का दबाव और SIT की जांच के बीच मंदिर प्रबंधन अब चौतरफा घिरता नजर आ रहा है। यह मामला न केवल मंदिर की साख से जुड़ा है, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था का भी सवाल है। चंपत राय का इनकार जांच को और अधिक संवेदनशील बना रहा है, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।

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