गाजा में प्लानिंग के तहत बच्चों का नरसंहार: UN रिपोर्ट में इजरायली सेना का भयावह चेहरा बेनकाब
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गाजा युद्ध के दौरान इजरायली सेना पर लगे आरोपों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र जांच आयोग की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गाजा में बच्चों की मौत का आंकड़ा महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था।

20,000 बच्चों की मौत, 44,000 घायल आयोग के अध्यक्ष और भारतीय हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर ने बताया कि 7 अक्टूबर 2023 से 2025 के बीच गाजा, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में 20,000 से अधिक बच्चे मारे गए हैं। इसके अलावा 44,000 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से घायल या अपंग हुए हैं।

सटीक हथियारों से किया गया शिकार रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायली सेना ने बच्चों को निशाना बनाने के लिए बेहद सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया। जस्टिस मुरलीधर ने बताया कि सेना ने घनी आबादी वाले इलाकों में ड्रोन, क्वाडकॉप्टर और स्नाइपर राइफलों का उपयोग किया।

डॉक्टरों और गवाहों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे लाए गए, जिनकी गर्दन या सिर पर एक ही सटीक गोली लगी थी। यह साफ तौर पर किसी सोची-समझी सैन्य कार्रवाई की ओर इशारा करता है।

शिक्षा और भविष्य का खात्मा इजरायली हमलों ने गाजा के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, गाजा के 97% स्कूल पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। बच्चे न केवल अपने परिवार खो चुके हैं, बल्कि पिछले तीन वर्षों से वे औपचारिक शिक्षा से भी पूरी तरह कट चुके हैं।

सिर्फ निंदा काफी नहीं, अब कार्रवाई का वक्त जस्टिस मुरलीधर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब केवल निंदा करने का समय बीत चुका है।

आयोग ने उन देशों से सख्त कदम उठाने को कहा है जिनके इजरायल के साथ सैन्य, व्यापारिक या कूटनीतिक संबंध हैं। रिपोर्ट में यूनिवर्सल ज्यूरिस्डिक्शन (सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र) के तहत युद्ध अपराधों में शामिल लोगों की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। हालांकि, इजरायल ने इस जांच आयोग के साथ सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया है।

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