मुजफ्फरनगर में हैवानियत: फैक्ट्री में बंधक बनाकर मजदूरों को कोड़े से पीटा, नाबालिगों सहित 12 को कराया गया मुक्त
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बंधुआ मजदूरी का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। टिटावी थाना क्षेत्र के मंडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री में 12 मजदूरों को नरक जैसी परिस्थितियों में रखा गया था। प्रशासन की छापेमारी में इसका खुलासा हुआ।

कोड़ों से पिटाई और टॉर्चर का शिकार मुजफ्फरनगर पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर इन मजदूरों को फैक्ट्री से मुक्त कराया। मजदूरों के शरीर पर कोड़ों के निशान और गंभीर घाव मिले हैं। उन्हें फैक्ट्री में कैद कर लोहे की बेल्ट और अन्य हथियारों से प्रताड़ित किया जाता था।

सपनों का सौदा: 12 हजार का लालच, गुलामी का जाल मजदूरों को अलग-अलग राज्यों से 12,000 रुपये मासिक वेतन का लालच देकर लाया गया था। लेकिन फैक्ट्री पहुंचते ही उनसे मोबाइल छीन लिए गए और उन्हें एक साल से अधिक समय तक बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्हें न तो वेतन दिया जाता था और न ही कहीं जाने की इजाजत थी।

12-14 घंटे का अमानवीय श्रम मुक्त हुए मजदूरों ने बताया कि उनसे बिना सुरक्षा उपकरणों के 12-14 घंटे काम कराया जाता था। धूल, केमिकल और गर्म मशीनों के बीच काम करते हुए वे मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुके थे। इस काम में नाबालिग बच्चों को भी झोंका गया था, जो बाल श्रम कानून का खुला उल्लंघन है।

दो मालिक गिरफ्तार, एक की तलाश जारी पुलिस ने इस मामले में फैक्ट्री मालिक प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मुख्य आरोपी अंकित बालियान घटना के बाद से फरार है। एसएसपी संजय कुमार ने बताया कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं।

सख्त कानूनों के तहत मामला दर्ज आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 और बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है। प्रशासन ने मुक्त कराए गए मजदूरों के लिए पुनर्वास, भोजन और तत्काल आर्थिक सहायता की घोषणा की है। नाबालिगों को बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंपा जा रहा है।

एक कड़वी सच्चाई यह घटना केवल मुजफ्फरनगर की नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में छिपे आधुनिक गुलामी के गहरे घावों को उजागर करती है। गरीबी और बेरोजगारी का फायदा उठाकर गरीबों को बंधक बनाकर शोषण करने वाली ऐसी फैक्ट्रियां अब प्रशासन की रडार पर हैं। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाना अब एक बड़ी चुनौती है।

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