ब्रिटेन एक बार फिर ग्रूमिंग गैंग्स (बाल यौन शोषण गिरोह) के काले सच से दहल उठा है। संसद में सांसद रूपर्ट लो द्वारा पढ़ी गई पीड़िताओं की गवाहियों ने दशकों से दबी हुई उस त्रासदी को उजागर कर दिया है, जिसे अब तक प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक चुप्पी के पर्दे में ढका गया था।
संसद में सुनाई गई रूह कंपा देने वाली दास्तां सांसद रूपर्ट लो ने जब पीड़िताओं के बयान संसद में पढ़े, तो वहां सन्नाटा पसर गया। एक पीड़िता ने बताया कि 13 से 16 साल की उम्र के बीच करीब तीन साल तक उसे लगातार हवस का शिकार बनाया गया। उसने रोते हुए कहा, मुझे लगता है कि इन तीन वर्षों में करीब 600 से 700 अलग-अलग पुरुषों ने मेरा बलात्कार किया।
एक अन्य पीड़िता ने बताया कि उसे और अन्य लड़कियों को कुत्तों के पिंजरों में कैद करके रखा जाता था। कई पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया, उन्हें केवल कुछ गोलियां देकर वापस भेज दिया गया।
श्वेत और ईसाई होने की सजा संसद में हुए खुलासों के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ितों को उनके रंग और धर्म के आधार पर निशाना बनाया। पीड़िताओं ने बताया कि आरोपी अक्सर उनसे कहते थे कि श्वेत और ईसाई लड़कियों की कोई इज्जत नहीं होती। क्रॉस पहनने वाली लड़कियों का अपमान किया जाता था और उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनका शोषण करना गलत नहीं है। यह नफरत और यौन हिंसा का एक मिला-जुला क्रूर चेहरा था।
संस्थागत विफलता का बड़ा आरोप यह मामला केवल अपराधियों तक सीमित नहीं है; पुलिस, स्थानीय प्रशासन और बाल संरक्षण एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। दशकों तक अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश भी नहीं की कि अपराधियों का नेटवर्क कितना बड़ा है। आरोप है कि नस्लीय संवेदनशीलता के डर से पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करने के बजाय मुंह मोड़ लेना बेहतर समझा।
क्या है पाकिस्तानी मूल के आरोपियों का कनेक्शन? विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा वह केसी रिपोर्ट है, जिसमें खुलासा हुआ कि कई क्षेत्रों में पकड़े गए अपराधियों में पाकिस्तानी या एशियाई मूल के पुरुषों की संख्या अधिक थी। हालांकि, इसे लेकर ब्रिटेन में दो फाड़ हो गई है—एक धड़ा अपराधियों की पृष्ठभूमि पर स्पष्ट चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा तर्क देता है कि चंद गुनहगारों की वजह से पूरे समुदाय को कटघरे में नहीं खड़ा किया जा सकता।
क्या भविष्य में मिलेगा न्याय? ब्रिटिश गृह मंत्री यवेट कूपर ने स्वीकार किया है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में गंभीर प्रशासनिक चूक हुई है। सरकार ने अब एक स्वतंत्र राष्ट्रीय जांच का ऐलान किया है, ताकि पुराने मामलों की फाइलें फिर से खोली जा सकें।
सवाल यह है कि क्या दशकों तक अंधेरी गलियों में अपमान और यातना सहने वाली उन लड़कियों को असली न्याय मिल पाएगा? सांसद रूपर्ट लो ने साफ कहा है, अब केवल बहस का समय नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई का समय है।
I want the world to hear what we heard. pic.twitter.com/2DtCS0QztE
— Rupert Lowe MP (@RupertLowe10) June 1, 2026
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