यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की एक हालिया रिपोर्ट ने भारत के लिए व्यापारिक चिंताएं बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जबरन मज़दूरी (forced labor) से तैयार सामानों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहा है। इस नाकामी के चलते अमेरिका भारत के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
USTR की जांच में भारत समेत 60 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया था, जो अमेरिका के कुल आयात का 99% हिस्सा बनाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन 54 देशों की सूची में है, जिन्होंने जबरन मज़दूरी से बने उत्पादों को रोकने के लिए कोई ठोस कानूनी ढांचा नहीं बनाया है।
USTR ने स्पष्ट किया है कि ऐसी नीतियां अमेरिकी वाणिज्य (US Commerce) पर बोझ डालती हैं। यह अनुचित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है, क्योंकि अमेरिकी उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उन सस्ते सामानों से मुकाबला करना पड़ता है जो जबरन श्रम से तैयार किए गए हैं।
रिपोर्ट के नतीजों के बाद, अमेरिका ने भारत से आयात होने वाली वस्तुओं पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम यूएस ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत उठाया जा रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर गहन चर्चा चल रही है। 1 जून से 4 जून तक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर है, जहाँ इन व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत की जा रही है।
USTR का मानना है कि जबरन मज़दूरी पर रोक न लगाना वैश्विक व्यापार के मानदंडों को बिगाड़ता है। जहाँ एक ओर कनाडा, मैक्सिको और यूरोपीय संघ जैसे देशों के पास कानून तो हैं, लेकिन उन्हें लागू करने में वे भी पीछे रहे हैं, वहीं भारत की स्थिति को पूरी तरह से विफल माना गया है।
अब सबकी निगाहें जारी बातचीत पर टिकी हैं। क्या भारत सरकार इस मुद्दे पर कोई नया नीतिगत बदलाव पेश करेगी, या व्यापार शुल्क (टैरिफ) के रूप में भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका लगेगा? यह देखना बाकी है।
For nearly a century, the United States has prohibited the importation of goods made with forced labor. It is time for our trading partners to follow suit.
— United States Trade Representative (@USTradeRep) June 3, 2026
Today, Ambassador Greer determined that the acts, policies, and practices of 60 economies related to the failure to… pic.twitter.com/JWyRCDyXHL
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