मालवीय नगर अग्निकांड: 21 मौतों ने खोली दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था की पोल
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राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके मालवीय नगर में बुधवार, 3 जून की सुबह लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट और उसी इमारत में स्थित फ्लोरिस स्टे होटल में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। छह मंजिला इमारत में फैली इस आग ने अब तक 21 लोगों की जान ले ली है, जबकि कई अन्य अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

कांच टूटते ही भड़की आग का तांडव प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की शुरुआत सुबह करीब 8:51 बजे ग्राउंड फ्लोर से हुई। स्थानीय लोगों ने जब आग बुझाने के लिए रेस्टोरेंट के बड़े शीशे तोड़े, तो ऑक्सीजन मिलते ही आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग तेजी से बेसमेंट की ओर फैल गई, जिससे इमारत जहरीले धुएं के गुबार में तब्दील हो गई। सुबह 9:45 बजे दमकल विभाग को सूचना मिली, जिसके बाद 10 गाड़ियों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदे लोग इमारत का मुख्य निकास द्वार पूरी तरह ब्लॉक हो चुका था। दम घोंटने वाले धुएं से बचने के लिए लोग बालकनी और खिड़कियों पर आकर मदद की गुहार लगाने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नीचे मौजूद स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाई और जमीन पर गद्दे बिछा दिए। जान बचाने के लिए तीसरी और चौथी मंजिल से कई लोगों ने छलांग लगा दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

सुरक्षा मानकों की घोर लापरवाही इस हादसे ने रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह छह मंजिला इमारत बिना उचित फायर सेफ्टी सिस्टम और इमरजेंसी एग्जिट के चल रही थी। प्रशासन का कहना है कि होटल दूसरे लाइसेंस की आड़ में अवैध रूप से संचालित था और बेसमेंट का इस्तेमाल भी नियमानुसार नहीं हो रहा था।

प्रशासन की चेतावनी: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने बताया कि इस इमारत के संचालन में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि होटल प्रबंधन की लापरवाही ही इस त्रासदी का मुख्य कारण है। सरकार ने एमसीडी से शहर भर के ऐसे होटलों की रिपोर्ट मांगी है। चेतावनी दी गई है कि रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहे सभी ऐसे परिसरों की जांच होगी और उन्हें सील किया जाएगा।

क्या टाली जा सकती थी यह त्रासदी? फिलहाल इस बात की तकनीकी जांच की जा रही है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी या किसी अन्य कारण से। हालांकि, 21 लोगों की मौत ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी भयावह साबित हो सकती है। क्या यह हादसा प्रशासन की ढिलाई का नतीजा है? इस सवाल का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा, लेकिन तब तक दिल्ली के लोग इस सवाल के साथ खौफ में जीने को मजबूर हैं कि क्या वे सुरक्षित इमारतों में रह रहे हैं?

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