वंदे मातरम पर तमिलनाडु में सियासी घमासान, विजय सरकार के खिलाफ DMK का मोर्चा
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तमिलनाडु की राजनीति में वंदे मातरम का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मुख्यमंत्री विजय की कैबिनेट के विस्तार समारोह के दौरान राज्य गीत को तीसरे स्थान पर रखे जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दल DMK ने इसे राज्य की परंपरा का अपमान करार देते हुए सरकार को कड़ी चेतावनी दी है।

क्या है पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत कैबिनेट विस्तार समारोह से हुई। कार्यक्रम में प्रोटोकॉल से हटकर सबसे पहले वंदे मातरम बजाया गया, उसके बाद राष्ट्रगान जन गण मन और अंत में तमिलनाडु का राज्य गीत (तमिल थाई वाज़्तु) बजाया गया। सामान्यतः राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में सबसे पहले राज्य गीत बजाने की परंपरा रही है।

DMK का तीखा हमला DMK की आईटी सेल ने सोशल मीडिया पर इस कदम की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का आरोप है कि विजय सरकार बीजेपी की तर्ज पर राजनीति कर रही है। DMK ने साफ कहा है कि भविष्य में इस नई प्रथा को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी ने इसे तमिल अस्मिता और भाषा का अपमान बताते हुए विरोध का ऐलान किया है।

इतिहास की याद दिलाई DMK ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि पार्टी का उदय ही हिंदी साम्राज्यवाद के विरोध से हुआ था। 1965 के आंदोलन के बाद सत्ता में आई DMK ने पिछले 60 सालों से तमिलनाडु में त्रि-भाषा नीति को लागू नहीं होने दिया है। पार्टी का मानना है कि राज्य गीत को प्राथमिकता न देना उनकी संस्कृति के साथ खिलवाड़ है।

सहयोगी भी हुए नाराज दिलचस्प बात यह है कि इस विवादास्पद प्रोटोकॉल पर टीवीके नेता आधव अर्जुन ने भी असहमति जताई है। उन्होंने इस नई प्रथा को गलत ठहराते हुए कहा कि तमिलनाडु के राज्य गीत को तीसरे पायदान पर रखना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य के कार्यक्रमों में पुरानी परंपरा ही बहाल रहेगी, जिसमें शुरुआत राज्य गीत से और समापन राष्ट्रगान से होगा।

अम्मा कैंटीन में सुधार के निर्देश इस विवाद के बीच सीएम विजय ने राज्य की अम्मा कैंटीन को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कैंटीन के बुनियादी ढांचे को सुधारने और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही ढंग से मिल सके।

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