भविष्य की तकनीक के लिए बड़ी डील: भारत-नीदरलैंड के बीच सेमीकंडक्टर को लेकर हुआ ऐतिहासिक समझौता
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भारत और नीदरलैंड्स ने सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में एक नई इबारत लिखी है। अपनी पांच देशों की यात्रा के दूसरे पड़ाव पर नीदरलैंड्स पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) हुआ है। यह करार भारत के टाटा ग्रुप और नीदरलैंड्स की दिग्गज कंपनी ASML के बीच संपन्न हुआ है।

धोलेरा प्लांट को मिलेगी नई रफ्तार इस समझौते के तहत, नीदरलैंड्स की तकनीक दिग्गज कंपनी ASML, गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा स्थापित की जा रही सेमीकंडक्टर फैक्ट्री के निर्माण और विस्तार में अपना सहयोग प्रदान करेगी। यह कदम भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

युवाओं के लिए खुलेंगे विकास के द्वार पीएम मोदी ने इस साझेदारी पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग और गहरा हो रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत की प्रगति हमारे देश के युवाओं के लिए बड़े अवसर लेकर आ रही है। यह वह क्षेत्र है जिसमें हम आने वाले समय में और अधिक तेजी और मजबूती के साथ आगे बढ़ेंगे।

सीईओ राउंड टेबल में पीएम का आह्वान हेग में आयोजित सीईओ राउंड टेबल मीटिंग को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने डच व्यापारिक समुदाय को भारत में निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, भारत और नीदरलैंड्स की रणनीतिक साझेदारी व्यापारिक संबंधों को नई ऊर्जा दे रही है। मुझे पूरा विश्वास है कि आप भारत में अपना निवेश और दायरा बढ़ाएंगे, जिससे पूरे यूरोप का इनोवेशन इकोसिस्टम भारत के साथ जुड़ेगा।

भारत में खोज होगी सफल और सार्थक प्रधानमंत्री ने डच बिजनेस समुदाय को संबोधित करते हुए एक डच कहावत का जिक्र किया कि जहाज बंदरगाहों पर सुरक्षित तो रहते हैं, लेकिन वे वहां खड़े रहने के लिए नहीं बने हैं। उन्होंने विश्वास दिलाते हुए कहा कि भारत में डच कंपनियों की नई खोज और विस्तार न केवल सफल, बल्कि बेहद सार्थक साबित होगी।

सुरक्षा और लचीली सप्लाई चेन पर जोर नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने भी इस साझेदारी को संबंधों का एक स्वाभाविक और तार्किक अगला कदम बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि मैरीटाइम इंडस्ट्री, ऊर्जा क्षेत्र, सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने और साइबर खतरों से निपटने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने भारत के साथ इस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभकारी बताया।

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