महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का कार्यालय इन दिनों गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। कंपनी के कर्मचारियों पर जबरन धर्म परिवर्तन और महिला सहकर्मियों के यौन शोषण का आरोप लगा है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।
आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज इस मामले की मुख्य आरोपी और TCS की प्रोसेस एसोसिएट निदा खान फिलहाल फरार है। निदा ने नासिक की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, जिसमें उसने अपनी दो महीने की गर्भावस्था का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से राहत मांगी थी। हालांकि, अदालत ने उसे राहत देने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई 27 अप्रैल तय की है।
क्या है पीड़िता का गंभीर आरोप? एक पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जून 2025 से मार्च 2026 के बीच उसे पांच आरोपियों ने यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया। पीड़िता का दावा है कि आरोपी न केवल उसे प्रताड़ित करते थे, बल्कि हिंदू देवी-देवताओं के प्रति भी अपमानजनक टिप्पणियां करते थे। पीड़िता ने बताया कि टीम लीडर ट्रेनिंग के बहाने उसे गलत तरीके से छूता था और उसकी निजी जिंदगी को लेकर अश्लील बातें करता था।
सोशल मीडिया पर भी स्टॉकिंग का आरोप पीड़िता के अनुसार, आरोपी केवल ऑफिस तक सीमित नहीं थे। उसे सोशल मीडिया पर भी लगातार परेशान किया जाता था। पीड़िता ने कई बार आरोपियों को ब्लॉक करने का प्रयास किया, लेकिन वे नए तरीकों से उसे स्टॉक करते रहे, जिसके बाद उसे कानूनी रास्ता अपनाना पड़ा।
अब तक आठ गिरफ्तार, पीड़ितों में अधिकांश युवा महिलाएं पुलिस की कार्रवाई में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिलाएं मध्यम वर्गीय परिवारों से हैं और उनकी उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच है। ये सभी एसोसिएट स्तर पर कार्यरत थीं। पुलिस का दावा है कि निदा खान इस पूरे रैकेट में सक्रिय रूप से शामिल थी।
आरोपी के वकील का पक्ष निदा खान के वकील बाबा सैय्यद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि FIR में जबरन धर्म परिवर्तन का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केवल एक CR (कस्टमर रिपोर्ट) में निदा का जिक्र है, तो उसे मास्टरमाइंड क्यों बताया जा रहा है। उन्होंने निदा के HR होने की बात से भी इनकार किया है।
कंपनी ने कहा- जीरो टॉलरेंस पॉलिसी मामले पर TCS ने अपनी सफाई जारी करते हुए कहा है कि कंपनी उत्पीड़न के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है। कंपनी ने आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। TCS का कहना है कि प्रारंभिक जांच में उन्हें कंपनी के आधिकारिक एथिक्स चैनल पर किसी प्रकार की शिकायत नहीं मिली थी। अब मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बाहरी एजेंसियों और एक ओवरसाइट पैनल की मदद ली जा रही है।
नासिक के बाद अब नागपुर में भी इसी तरह के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है, जिससे कॉरपोरेट जगत में एक बड़ी साजिश की आशंका जताई जा रही है।
*#WATCH नासिक, महाराष्ट्र | नासिक TCS केस में आरोपियों में से एक निदा खान के वकील बाबा सैय्यद ने कहा, ... अगर आप FIR देखें, तो उसमें ज़बरदस्ती धर्म बदलने का कोई ज़िक्र नहीं है... मुझे नहीं पता कि उसे मास्टरमाइंड क्यों बताया जा रहा है, जबकि उसके शामिल होने का ज़िक्र सिर्फ़ एक CR… pic.twitter.com/oHwG7AkGD0
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 17, 2026
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