भारतीय राजनीति अब वैचारिक मतभेदों से आगे निकलकर व्यक्तिगत और अभद्र टिप्पणियों के अखाड़े में तब्दील हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी नेताओं द्वारा इस्तेमाल की जा रही भाषा का स्तर न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि यह संसदीय मर्यादाओं के पतन को भी दर्शाता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों का आंकड़ा अब 129 को पार कर चुका है।
21 अप्रैल, 2026 को भारतीय राजनीति के लिए एक काला दिन माना गया, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चेन्नई में प्रधानमंत्री को आतंकवादी करार दिया। खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री समानता में विश्वास नहीं रखते। शीर्ष नेतृत्व द्वारा दी गई इस टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया कि विपक्षी खेमे में वैचारिक असहमति अब गहरी व्यक्तिगत नफरत में बदल चुकी है।
विपक्ष ने प्रधानमंत्री को नीचा दिखाने के लिए इतिहास और पौराणिक पात्रों का भी सहारा लिया है। 29 अगस्त, 2025 को महाराष्ट्र कांग्रेस के अतुल लोंढे पाटिल ने उन्हें दुर्योधन कहा, तो वहीं 9 मई, 2024 को शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने उन्हें औरंगजेब की संज्ञा दी। राउत यहीं नहीं रुके, उन्होंने प्रधानमंत्री को महाराष्ट्र की धरती पर गाड़ने तक की धमकी दे डाली।
राजनीति की मर्यादाएं तब पूरी तरह तार-तार हो गईं जब विपक्षी नेताओं ने पीएम मोदी के परिवार और माता-पिता को निशाना बनाया। पवन खेड़ा ने उनके पिता को गौतम दास कहा, सुप्रिया श्रीनेत ने उनके पूर्वजों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, और गोपाल इटालिया ने पीएम की 100 वर्षीय माताजी हीराबा के लिए नौटंकी जैसे शब्दों का प्रयोग किया। यह दर्शाता है कि अब विरोध का केंद्र नीतिगत आलोचना नहीं, बल्कि निजी चरित्र हनन बन गया है।
विपक्ष ने प्रधानमंत्री के लिए उपमाओं का एक विचित्र कोश तैयार कर लिया है। कहीं उन्हें जहरीला सांप कहा गया, तो कहीं रावण , गब्बर या भूत । संजय राउत और मुकेश सहनी जैसे नेताओं ने शब्दों की सारी मर्यादाएं तोड़ते हुए हिंसक और घृणित शब्दों का इस्तेमाल किया है। वहीं, राजद नेता अवधेश सिंह यादव ने तो सार्वजनिक मंच से यह तक पूछ लिया कि अगर मोदी की खोपड़ी में गोली मार दी जाए तो क्या गलत होगा?
अरविंद केजरीवाल द्वारा सबसे कम पढ़ा-लिखा बताने से लेकर राहुल गांधी द्वारा पनौती और डरा हुआ तानाशाह जैसे संबोधन तक, विपक्ष की रणनीति स्पष्ट है। हालांकि, 2014 से 2026 तक का राजनीतिक इतिहास यह बताता है कि प्रधानमंत्री पर जितने अधिक व्यक्तिगत हमले हुए, जनता का समर्थन उतना ही बढ़ता गया।
मणिशंकर अय्यर के नीच शब्द से लेकर ममता बनर्जी के साला तक, अपशब्दों की यह फेहरिस्त केवल विपक्ष की हताशा को दर्शाती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जनता विकास के मुद्दों को छोड़कर इस गाली-राजनीति को समर्थन देती है या फिर इसे पूरी तरह नकार देती है।
Chennai, Tamil Nadu: Congress President Mallikarjun Kharge says, How can they (AIADMK) join with Modi? He is a terrorist. And he who won t believe in equality. His party won t believe in equality and justice. And these people are joining with them, it means that they are… pic.twitter.com/qymq7H54Z7
— IANS (@ians_india) April 21, 2026
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