जिनपिंग का वादा, ट्रंप का पछतावा: क्या चीन ने ईरान को दी घातक खेप?
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अगले महीने 14-15 मई को होने वाला चीन दौरा चर्चा में है। यह पिछले 8 वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा होगी। ट्रंप को उम्मीद थी कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देगा, लेकिन उनके इस भरोसे को एक बड़ा झटका लगा है।

ट्रंप की नाराजगी की वजह अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के एक कंटेनर जहाज टूस्का को पकड़ा है। ट्रंप ने CNBC को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें इस घटना से हैरानी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जहाज चीन से ईरान के लिए खास तोहफा ले जा रहा था, जो बिल्कुल भी अच्छा नहीं था। ट्रंप ने माना कि उन्हें लगता था कि शी जिनपिंग के साथ उनकी अच्छी समझ है, लेकिन यह घटना उस भरोसे के खिलाफ है।

मिसाइल-केमिकल का खतरनाक खेल दावा किया जा रहा है कि पकड़े गए जहाज में केमिकल मटीरियल था, जिसका इस्तेमाल ईरान की मिसाइलों को बनाने में किया जाना था। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि चीन सीधे तौर पर ईरान सरकार की मदद कर रहा है और यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

चीन का गोलमोल जवाब विवाद बढ़ता देख चीन ने अपना बचाव किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वह एक विदेशी जहाज था और चीन का इसके साथ कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन के इस दावे को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

क्या जिनपिंग ने तोड़ा वादा? ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि युद्ध के दौरान ईरान को कोई भी चीनी हथियार नहीं दिया जाएगा। लेकिन फरवरी में आई रॉयटर्स की रिपोर्ट ने इन दावों की पोल खोल दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और चीन के बीच सीएम-303 (CM-303) एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों की डील पर बातचीत चल रही थी। यह मिसाइल अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

बढ़ता तनाव और अमेरिका की चिंता ईरान सीजफायर का फायदा उठाकर अपने मिसाइल बेड़े को फिर से मजबूत करने की कोशिश में है। अमेरिकी नौसेना के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। अब देखना यह होगा कि इस कूटनीतिक धोखे के आरोपों के बीच ट्रंप का चीन दौरा कैसा रहता है, और क्या वह जिनपिंग से इस मुद्दे पर कोई ठोस जवाब मांग पाएंगे।

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