पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। एक टीवी कार्यक्रम के दौरान मौली चंद्रा नाम की छात्रा ने सरेआम पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था की कलई खोल कर रख दी। मौली का आरोप है कि उसके पिता की मौत कोई सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या (कॉन्ट्रैक्ट किलिंग) थी।
क्या है पूरा मामला? मौली के पिता स्वर्गीय श्यामल चंद्रा एक एलआईसी एजेंट और व्यवसायी थे। छह महीने पहले काली पूजा के अगले दिन खड़गपुर के उत्सव लॉज के सामने उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इसे सड़क हादसा मानकर फाइल बंद करने की कोशिश की, लेकिन मौली का दावा है कि उसके पास सीसीटीवी फुटेज है, जिसमें साफ दिख रहा है कि एक तेज रफ्तार बाइक ने जानबूझकर उनके पिता को टक्कर मारी।
सिस्टम की बेरुखी और पुलिस की भूमिका मौली का दर्द तब छलक पड़ा जब उसने बताया कि वह न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। छात्रा का आरोप है कि जब वह एफआईआर दर्ज कराने टाउन थाने पहुंची, तो पुलिस अधिकारियों ने आरोपी का नाम लिखने से साफ मना कर दिया। पुलिस पर दबाव बनाया गया कि वह इस मामले को सिर्फ एक बाइक एक्सीडेंट के रूप में ही दर्ज करे।
अकेली पड़ गई इंसाफ की लड़ाई मौली ने भारी मन से कहा कि इस tragedy के बाद किसी भी राजनीतिक दल या पुलिस अधिकारी ने उसकी मदद नहीं की। चुनावी शोर और बड़े-बड़े वादों के बीच एक बेटी का अपने पिता के लिए न्याय मांगना यह दर्शाता है कि आम आदमी की त्रासदी आज के दौर में कितनी गौण हो गई है।
प्रशासन के लिए खड़ी हुई बड़ी चुनौती इस मामले ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्यक्रम के दौरान होस्ट ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए प्रशासन से पारदर्शी जांच की अपील की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या मौली को इंसाफ मिलेगा या राजनीति और पुलिस की फाइलों में यह मामला भी दब जाएगा।
प्रश्न: छात्रा मौली चंद्रा ने अपने पिता की मौत के बारे में क्या आरोप लगाया है? उत्तर: छात्रा का आरोप है कि उनके पिता श्यामल चंद्रा की मौत बाइक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि एक कॉन्ट्रैक्ट किलर द्वारा की गई हत्या थी, जिसके सबूत (CCTV) उनके पास हैं।
प्रश्न: पुलिस की कार्यप्रणाली पर छात्रा ने क्या सवाल उठाए? उत्तर: मौली के अनुसार, पुलिस ने हत्या का केस दर्ज करने के बजाय इसे एक्सीडेंट का मामला बनाया और एफआईआर में मुख्य आरोपी का नाम शामिल करने से इनकार कर दिया।
प्रश्न: यह घटना कब और कहां की है? उत्तर: यह घटना लगभग छह महीने पहले पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में उत्सव लॉज के पास हुई थी।
प्रश्न: मामले का असर क्या हुआ? उत्तर: कार्यक्रम के दौरान इस मुद्दे के उठने से राजनीतिक चर्चा थम गई और व्यवस्था से पीड़ित छात्रा को न्याय दिलाने के लिए व्यापक दबाव बनाया गया।
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— News18 India (@News18India) April 21, 2026
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