जदयू में नई भूमिका: श्रवण कुमार बने विधायक दल के नेता, बोले- पार्टी का भरोसा टूटने नहीं देंगे
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बिहार की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अब श्रवण कुमार को जदयू (JDU) विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। बिहार विधानसभा ने इस नियुक्ति का आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

यह निर्णय नीतीश कुमार द्वारा कल हुई जदयू विधानमंडल दल की बैठक में मिले अधिकारों के बाद लिया गया है।

अनुभवी नेता पर पार्टी का दांव

जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने श्रवण कुमार को बधाई देते हुए उनके लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि श्रवण कुमार पार्टी के सबसे वरिष्ठ और भरोसेमंद साथियों में से एक हैं।

संजय झा ने बताया कि जब जदयू के सिर्फ सात विधायक पहली बार विधानसभा पहुंचे थे, तब से श्रवण कुमार पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनका अनुभव पार्टी को नई दिशा देने में काफी मददगार साबित होगा।

ईमानदारी से निभाऊंगा जिम्मेदारी

विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद श्रवण कुमार ने नीतीश कुमार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है और वे इस बड़ी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे।

श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता पार्टी को मजबूत करना और सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा, पार्टी ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, मैं उसे कभी टूटने नहीं दूंगा।

सरकार और संगठन में तालमेल पर जोर

अपनी नई भूमिका को लेकर श्रवण कुमार ने कहा कि वे सभी विधायकों को साथ लेकर चलेंगे। उनका मुख्य फोकस विधानसभा में सरकार और पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने पर होगा। वे सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना चाहते हैं, ताकि बिहार में जारी विकास कार्यों की गति को और तेज किया जा सके।

राहुल गांधी पर संजय झा का पलटवार

वहीं, नीतीश कुमार को लेकर राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयानों पर संजय झा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। झा ने कहा कि राहुल गांधी को दूसरों पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि बिहार में कांग्रेस की स्थिति जगजाहिर है, जहाँ वे मात्र 6 सीटों पर सिमट कर रह गए हैं।

कौन हैं श्रवण कुमार?

श्रवण कुमार का बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ 30 साल से अधिक का पुराना रिश्ता है। इससे पहले भी वे मुख्य सचेतक (Chief Whip) के रूप में पार्टी का अनुशासन और समन्वय बनाए रखने के लिए अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं। उनके इसी सांगठनिक अनुभव का लाभ अब जदयू को नई भूमिका में मिलेगा।

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