ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत का मास्टरस्ट्रोक , समंदर को मिलेगा नया सिकंदर तारागिरी
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दुनिया जब ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं में उलझी है, भारत ने अपनी समुद्री ताकत को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। शुक्रवार, 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना को एक नया और घातक समंदर का सिकंदर मिलने जा रहा है, जिसका नाम है तारागिरी ।

ब्रह्मोस से लैस, दुश्मनों के लिए काल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम में अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट तारागिरी को आधिकारिक तौर पर नौसेना में कमीशन करेंगे। यह युद्धपोत सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस है, जो सतह से सतह पर सटीक प्रहार करने में सक्षम है। इसके अलावा, इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली बराक-8 मिसाइलें और स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र भी तैनात हैं, जो इसे किसी भी दुश्मन के लिए अभेद्य बनाते हैं।

75% स्वदेशी तकनीक का दम मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित तारागिरी आत्मनिर्भर भारत का एक उत्कृष्ट नमूना है। 6,670 टन वजनी इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक उपकरण और तकनीक स्वदेशी है। इसका डिजाइन खुद भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। यह पोत 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है।

अत्याधुनिक रडार और सुरक्षा घेरा तारागिरी केवल मिसाइलों का जखीरा नहीं है, बल्कि यह एक हाई-टेक प्लेटफॉर्म है। इसमें लगे आधुनिक सोनार, मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम पलक झपकते ही दुश्मन के हमलों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं। इसके डेक पर दो हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं, जो इसे और भी घातक बनाते हैं।

प्रोजेक्ट 17ए का हिस्सा तारागिरी, नीलगिरी क्लास के सात स्टील्थ फ्रिगेट के प्रोजेक्ट का चौथा सदस्य है। इससे पहले नीलगिरी, हिमगिरी, उदयगिरी और दूनागिरी जैसे शक्तिशाली युद्धपोत भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ा चुके हैं। इन सभी युद्धपोतों के नाम भारत की प्रमुख पर्वत शृंखलाओं पर रखे गए हैं, जो भारत की मजबूत और अटूट सुरक्षा नीति का प्रतीक है।

सिर्फ युद्ध नहीं, आपदा में भी मददगार अपनी युद्ध क्षमताओं के अलावा, तारागिरी मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी अहम भूमिका निभाएगा। यह युद्धपोत उच्च-तीव्रता वाले संघर्षों से लेकर संकट के समय नागरिकों की मदद तक—हर मोर्चे पर भारत की समुद्री सुरक्षा को एक नया मुकाम देता है। आज का दिन भारतीय नौसेना के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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