जो डर गया, समझो मर गया : राघव चड्ढा के वीडियो पर मचा घमासान, अपनों ने ही बोला हमला
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आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। चड्ढा के एक हालिया वीडियो के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन पर तीखे हमले किए हैं। खामोश करवाया गया, हारा नहीं के उनके बयान पर अब पार्टी के अंदर ही उन्हें डरपोक होने के कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।

सौरभ भारद्वाज का सीधा प्रहार आप नेता सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा के वीडियो पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, राघव भाई, जो डर गया, समझो वो मर गया। हम सब अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं। भारद्वाज ने चड्ढा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद में मिलने वाले सीमित समय का इस्तेमाल देश के बड़े मुद्दों को उठाने के लिए होना चाहिए, न कि समोसों की कीमत जैसी मामूली बातों पर।

अनुराग ढांडा का तीखा कटाक्ष आप के एक अन्य नेता अनुराग ढांडा ने भी राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए उन्हें जमकर घेरा। ढांडा ने तल्ख लहजे में कहा, संसद में देश बचाने का संघर्ष करना है या फिर एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने हैं? अगर कोई मोदी सरकार से डर जाए, तो वह देश की लड़ाई कैसे लड़ेगा?

ढांडा ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से घबरा रहे हैं। उन्होंने गुजरात में कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और पश्चिम बंगाल के मुद्दों पर चड्ढा की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।

सदन में सॉफ्ट पीआर का आरोप पार्टी नेताओं का मानना है कि राघव चड्ढा संसद में आक्रामक तेवर अपनाने के बजाय सॉफ्ट पीआर करने में ज्यादा व्यस्त हैं। ढांडा ने याद दिलाया कि जब सदन में चुनाव आयोग (CEC) के खिलाफ प्रस्ताव आया था, तब भी चड्ढा ने उस पर हस्ताक्षर करने से दूरी बना ली थी। पार्टी का मानना है कि चड्ढा जनता की आवाज बनने के बजाय अपनी छवि बचाने में लगे हैं।

पद से हटाने की कवायद तेज इस तनातनी के बीच, आप ने राघव चड्ढा के खिलाफ सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर चड्ढा को सदन में उप-नेता के पद से हटाने का आग्रह किया है। उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल का नाम प्रस्तावित किया गया है।

इतना ही नहीं, पार्टी ने यह मांग भी की है कि सदन में आप के कोटे से चड्ढा को बोलने के लिए समय न दिया जाए। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर गहराते आंतरिक कलह और नेतृत्व के प्रति असंतोष को उजागर करता है।

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