ईरान-अमेरिका जंग: ट्रंप का उलझा हुआ संबोधन, क्या बिना एग्जिट प्लान फंस गया सुपरपावर?
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अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया। पूरी दुनिया इस उम्मीद में थी कि ट्रंप इस गंभीर संकट का कोई ठोस समाधान पेश करेंगे, लेकिन उनका भाषण समाधान के बजाय और अधिक भ्रम पैदा कर गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका बिना किसी स्पष्ट कार्ययोजना के इस युद्ध में कूद पड़ा है?

न्यूक्लियर प्रोग्राम पर विरोधाभासी दावे

ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह नष्ट हो चुका है। हालांकि, तुरंत बाद उन्होंने यह भी कहा कि वहां भारी मलबा है और अगर ईरानी वहां यूरेनियम निकालने जाते हैं, तो उनके लिए अंदर जाना बहुत मुश्किल होगा। यह बयान ट्रंप के अपने ही दावों पर सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि वहां अभी भी यूरेनियम का भंडार मौजूद हो सकता है, जिसका अर्थ है कि परमाणु खतरा टला नहीं है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से हाथ पीछे खींचे

इस संबोधन का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर था। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब उस रास्ते की सुरक्षा करना अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि जो देश वहां से तेल खरीदते हैं, वे अपनी सुरक्षा खुद करें। तेल व्यापार के लिए दुनिया के सबसे संवेदनशील इलाके से अमेरिका का यू-टर्न वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है।

सत्ता परिवर्तन का कोई इरादा नहीं?

ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका का मकसद ईरान में रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) करना नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप अब इस युद्ध से किसी तरह बाहर निकलना चाहते हैं। लेकिन चुनौती यह है कि वह ऐसी राह तलाश रहे हैं जिससे अमेरिका की वैश्विक साख (ग्लोबल पावर इमेज) भी बची रहे और उसे हार का सामना भी न करना पड़े। वे फिलहाल एक सम्मानजनक वापसी का रास्ता खोज रहे हैं।

एक महीने से जारी तबाही, समाधान गायब

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद से खाड़ी देशों में बारूद का ढेर लगा है। ईरान के पलटवार ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजरायल को हिलाकर रख दिया है। युद्ध को एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन ट्रंप का संबोधन इस बात का सबूत है कि इस भीषण संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका के पास फिलहाल कोई ठोस योजना मौजूद नहीं है।

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