युद्ध के बीच मसीहा बना भारत: अफ्रीका और अफगानिस्तान को भेजा मदद का हाथ
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के साये के बीच भारत ने एक बार फिर वसुधैव कुटुंबकम की भावना को चरितार्थ किया है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस आपूर्ति में बाधाओं का सामना करने के बावजूद, भारत ने ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कई देशों को जीवनरक्षक दवाओं और अनाज की भारी खेप भेजी है।

बुर्किना फासो और मलावी: भुखमरी के खिलाफ जंग

भारत ने बुर्किना फासो को 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजा है। यह मदद वहां चल रहे गृहयुद्ध के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। वहीं, अल-नीनो के कहर और सूखे से जूझ रहे मलावी को भी भारत ने 1,000 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराया है।

सियरालियोन: स्कूली बच्चों के लिए बड़ा कदम

24 मार्च को भारत ने सियरालियोन को 1,000 मीट्रिक टन चावल की खेप भेजी। इसका मुख्य उद्देश्य वहां के स्कूलों में चल रही मिड-डे मील योजना को मजबूती देना है। भारत का यह कदम सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने की दिशा में एक अहम सहयोग माना जा रहा है।

मोजांबिक में आपदा राहत: नौसेना का सहारा

मोजांबिक में आई विनाशकारी बाढ़ के समय भारत ने तत्परता दिखाते हुए नौसेना के जहाज के जरिए मदद पहुंचाई। भारत ने 500 मीट्रिक टन चावल, 10 मीट्रिक टन टेंट-हाइजीन किट्स और करीब 89 टन जीवनरक्षक दवाएं मोजांबिक भेजीं। आपदा के समय भारत की यह फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका वैश्विक स्तर पर सराही जा रही है।

अफगानिस्तान: संकट में जीवनरक्षक दवाएं

पाकिस्तान के हमलों से प्रभावित अफगानिस्तान को भी भारत ने अकेला नहीं छोड़ा। 20 मार्च को काबुल को 2.5 टन इमरजेंसी मेडिकल किट और जीवनरक्षक दवाओं की खेप भेजी गई, ताकि घायलों का उपचार हो सके। इसके अलावा तंजानिया को भी भारतीय नौसेना के आईएनएस त्रिकंद के जरिए चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है।

कूटनीति और दरियादिली की प्रशंसा

एक तरफ जहां भारत खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत कर ईंधन संकट को संभालने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर मानवीय सहायता में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। सोशल मीडिया पर लोग भारत की इस दरियादिली की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वैश्विक मंच पर भारत अब न केवल एक बड़े आर्थिक शक्ति के रूप में, बल्कि एक भरोसेमंद और संवेदनशील पार्टनर के रूप में भी स्थापित हो रहा है।

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