पश्चिम बंगाल के मालदा से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे देश के प्रशासनिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। कालियाचक-II ब्लॉक में वोटर लिस्ट सुधारने गए न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा। यह घटना केवल एक विरोध नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है।
क्या हुआ मालदा में? सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कालियाचक-II में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का काम चल रहा था। 1 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजे एक उग्र भीड़ ने दफ्तर को घेर लिया। इस दल में सात न्यायिक अधिकारी शामिल थे, जिनमें तीन महिलाएं भी थीं। अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक बिना भोजन-पानी के बंधक रखा गया।
बढ़ती अराजकता और सरकारी विफलता भीड़ का दुस्साहस यहीं नहीं रुका। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया और स्थिति घंटों तक पुलिस के नियंत्रण से बाहर रही। रात एक बजे जब भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अधिकारियों को बाहर निकाला गया, तब उनकी गाड़ियों पर पथराव भी किया गया। यह राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त स्टैंड सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सोची-समझी साजिश करार दिया है। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि वे इस मामले में सीबीआई (CBI) या एनआईए (NIA) से जांच करवाने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं।
भाजपा का TMC पर तीखा हमला भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इसे जंगलराज बताते हुए कहा, स्वतंत्र भारत में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को इस तरह बाधित किया गया हो। स्मृति ईरानी और अन्य भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में हिंसा और टीएमसी एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं।
टीएमसी का बचाव उधर, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का तर्क है कि वोटर लिस्ट से एक विशेष वर्ग के लोगों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे थे, जिसके कारण स्थानीय जनता में आक्रोश था।
मालदा की यह घटना न्यायपालिका और चुनावी प्रक्रिया के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन के खिलाफ क्या कड़े कदम उठाता है और आगे की जांच किस दिशा में जाती है।
*WB polls:
— News Arena India (@NewsArenaIndia) April 2, 2026
Nobody could have imagined that lawlessness in Mamata Banerjee s govt would go to extent that judicial officers would be taken hostages.
- BJP leader Gaurav Bhatia on gherao of judicial officers in Malda pic.twitter.com/YYWc5t424v
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