मालदा में न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य सरकार को जारी किया नोटिस
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पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बुधवार को लोकतंत्र की मर्यादा तार-तार करने वाली एक घटना सामने आई। वोटर लिस्ट में नाम कटने से नाराज भीड़ ने सात चुनाव पर्यवेक्षकों (इलेक्शन ऑब्जर्वर) को 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान न तो उन्हें खाना मिला और न ही पीने का पानी।

क्या हुआ था मालदा में? घटनाक्रम यह पूरा विवाद सप्लीमेंट्री इन्फॉर्मेशन रिकॉन्सिलिएशन (SIR) प्रक्रिया के दौरान शुरू हुआ। सुबह 10 बजे से बीडीओ ऑफिस के बाहर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा शुरू हुआ। दोपहर 2 बजे जब अधिकारी काम के लिए पहुंचे, तो स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। शाम होते-होते हजारों लोगों ने ऑफिस को घेर लिया। रात 11 बजे भारी पुलिस बल के साथ उन्हें निकाला गया, लेकिन इस दौरान उनकी गाड़ियों पर ईंट-पत्थर बरसाए गए।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच (CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली) ने इसे सोची-समझी और भड़काऊ साजिश करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का एक सीधा प्रयास है।

अधिकारियों को कोर्ट का बुलावा सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसएसपी को नोटिस जारी कर 6 अप्रैल तक व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। कोर्ट ने जांच के लिए सीबीआई या एनआईए जैसी स्वतंत्र एजेंसी की संभावना पर भी विचार करने के निर्देश दिए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ा प्रहार न्यायालय ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि जहां भी न्यायिक अधिकारी काम कर रहे हैं, वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। अब SIR कार्यस्थल पर एक बार में केवल 5 लोगों को ही आने की अनुमति होगी और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।

क्यों हो रहा है विरोध? मालदा सहित 100 से अधिक गांवों में मतदाता सूची अपडेट के दौरान करीब 60 लाख नाम न्यायिक जांच के दायरे में हैं। दस्तावेजी गड़बड़ी और तकनीकी त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम कट गए, जिसे लेकर स्थानीय जनता और राजनीतिक दलों में भारी आक्रोश है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप इस घटना ने बंगाल की राजनीति में उबाल ला दिया है। जहां बीजेपी ने इसे डर का राज और ममता सरकार की विफलता बताया है, वहीं टीएमसी ने इसका ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ा है। बंगाल में अभी भी 705 न्यायिक अधिकारी चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने में जुटे हैं, जिनकी सुरक्षा अब एक बड़ी चुनौती बन गई है।

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