अमेरिका के नेब्रास्का ने दी दीपावली को आधिकारिक मान्यता, 9000 हिंदुओं के लिए ऐतिहासिक क्षण
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नेब्रास्का: अमेरिका के नेब्रास्का राज्य ने दीपावली के त्योहार को आधिकारिक मान्यता देकर भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का एक नया अध्याय लिखा है। राज्य की विधायिका द्वारा पारित इस प्रस्ताव को स्थानीय भारतीय समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

ऐतिहासिक प्रस्ताव और आधिकारिक मुहर नेब्रास्का की विधायिका ने दीपावली को आधिकारिक दर्जा देने वाला प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव को राज्य सीनेटर जॉन फ्रेडरिकसन द्वारा प्रायोजित किया गया था, जिस पर 31 मार्च को स्पीकर जॉन आर्च ने हस्ताक्षर कर इसे औपचारिक रूप दिया। सिएटल स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने इसे सांस्कृतिक समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है।

20 अक्टूबर को होगा भव्य आयोजन इस मान्यता के बाद राज्य में दीपावली के प्रति उत्साह बढ़ गया है। प्रस्ताव के अनुसार, इस वर्ष 20 अक्टूबर को गवर्नर जिम पिलेन के नेतृत्व में गवर्नर हाउस में एक बड़े दीपावली समारोह का आयोजन किया जाएगा। दूतावास ने सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि दीपावली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एकता, प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक है जो बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है।

नेब्रास्का में भारतीय समुदाय का प्रभाव कॉर्नहस्कर स्टेट के नाम से मशहूर नेब्रास्का में लगभग 9,000 हिंदू निवास करते हैं। राज्य के ओमाहा शहर में 1993 में स्थापित हिंदू मंदिर स्थानीय भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। सीनेटर फ्रेडरिकसन, जो लंबे समय से हिंदू समुदाय के सक्रिय समर्थक रहे हैं, ने इस प्रस्ताव के जरिए प्रवासी भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती दी है।

अमेरिका में बढ़ती दीपावली की स्वीकार्यता नेब्रास्का दीपावली को मान्यता देने वाला अमेरिका का नवीनतम राज्य बन गया है। इससे पहले पेंसिल्वेनिया, कैलिफोर्निया, कनेक्टिकट, टेक्सास और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों व शहरों में दीपावली को आधिकारिक मान्यता या स्कूलों में अवकाश का दर्जा मिल चुका है। वर्जीनिया की फेरफैक्स काउंटी भी इस सूची में शामिल है, जो अमेरिका के बहुसांस्कृतिक समाज में भारतीय त्योहारों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।

नेब्रास्का की अनूठी शासन प्रणाली नेब्रास्का अमेरिका का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसकी विधायिका एक-सदनीय (यूनिकैमरल) और गैर-पक्षपातपूर्ण है। 1937 से लागू इस अनूठी प्रणाली में 49 सीनेटर होते हैं। कृषि और मवेशी पालन के लिए प्रसिद्ध यह राज्य अब अपनी इस नई सांस्कृतिक पहल के कारण भारतीय प्रवासियों के लिए एक विशेष स्थान बनता जा रहा है।

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