बंगाल में न्यायिक अधिकारियों पर हमले की जांच अब NIA करेगी, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन
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पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना ने तूल पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद चुनाव आयोग ने अब इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने का निर्णय लिया है।

क्या है पूरा मामला? मालदा जिले के कालियाचौक स्थित बीडीओ कार्यालय में सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घंटों तक बंधक बनाकर रखा। ये अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनावी सूचियों के पुनरीक्षण (SIR) का काम कर रहे थे। करीब आठ घंटे के बाद पुलिस ने उन्हें मुक्त कराया, लेकिन इस दौरान पुलिस वैन पर पत्थरबाजी भी की गई।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायिक अधिकारियों को डराने का दुस्साहसी प्रयास करार दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीजेआई ने राज्य प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए इसे कर्तव्य में विफलता करार दिया और कहा कि यह एक सुनियोजित साजिश थी।

चुनाव आयोग का एक्शन अदालत के आदेश के तुरंत बाद, चुनाव आयोग ने NIA के महानिदेशक को पत्र लिखकर जांच करने का अनुरोध किया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाए। सूत्रों के अनुसार, NIA की एक टीम शुक्रवार को ही राज्य में पहुंच जाएगी।

ममता बनर्जी ने झाड़ा पल्ला घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी जिम्मेदारी से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था फिलहाल चुनाव आयोग के अधीन है, इसलिए प्रशासनिक विफलता के लिए वही जिम्मेदार हैं। उन्होंने इसे सुपर राष्ट्रपति शासन करार देते हुए कहा कि उनके पास कोई शक्ति नहीं बची है।

राजनीतिक ध्रुवीकरण पर सीजेआई की चिंता सुनवाई के दौरान सीजेआई ने इस बात पर चिंता जताई कि पश्चिम बंगाल में स्थिति राजनीतिक रूप से अत्यधिक ध्रुवीकृत हो गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह राज्य में चुनावी प्रक्रिया को पटरी से उतारने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देगी और दोषी अधिकारियों व उपद्रवियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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