क्या अब अभिषेक शर्मा के लिए स्टार से लीजेंड बनने का वक्त आ गया है?
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पिछले दो IPL सीजन में अभिषेक शर्मा का बल्ला तूफान बनकर गरजा है। 2024 में 204 और 2025 में 193 के स्ट्राइक रेट से रन बनाना उनकी काबिलियत का सबूत है। लेकिन, हालिया T20 वर्ल्ड कप में उनका खराब प्रदर्शन और लगातार शून्य पर आउट होने का सिलसिला क्रिकेट दिग्गजों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

डिविलियर्स की दो टूक: अब आप बच्चे नहीं रहे

दिग्गज एबी डिविलियर्स का मानना है कि अभिषेक 25 साल के हो चुके हैं, लिहाजा उन्हें जिम्मेदारी समझनी होगी। डिविलियर्स के मुताबिक, अभिषेक की समस्या टैलेंट की नहीं, बल्कि गेम अवेयरनेस की है। हर गेंद पर प्रहार करना बुद्धिमानी नहीं है; एक बल्लेबाज को यह सीखना होगा कि कब हमला करना है और कब स्ट्राइक रोटेट करनी है।

गावस्कर और शास्त्री की सलाह

सुनील गावस्कर का मानना है कि अभिषेक क्रीज पर सेट होने के लिए पर्याप्त समय नहीं लेते। पहली ही गेंद से बड़े शॉट खेलने की जिद उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है। वहीं, रवि शास्त्री का कहना है कि अभिषेक का स्ट्राइक रेट तभी घातक साबित होता है जब वह एक बार लय में आ जाएं। उन्हें बस क्रीज पर थोड़ा और वक्त बिताने की जरूरत है।

तकनीक में कहां है चूक?

वर्ल्ड कप के दौरान यह साफ दिखा कि अभिषेक शॉर्ट पिच गेंदों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। विशेषकर शरीर और हेलमेट के करीब आने वाली गेंदों पर उनका सिर पीछे की ओर हट जाता है, जिससे वे गलत शॉट खेल बैठते हैं। गेंदबाज अब इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें रिब्स के आसपास टारगेट कर रहे हैं।

ऑफ-स्पिन का डर

ऑफ-स्पिनर्स के खिलाफ भी अभिषेक की तकनीक सवालों के घेरे में है। जब पावरप्ले में स्टंप-टू-स्टंप गेंदबाजी होती है, तो अभिषेक शॉट खेलने के लिए जगह नहीं बना पाते। अगर शुरुआती ओवरों में बाउंड्री नहीं मिलती, तो वे जल्दबाजी में क्रॉस-बैट शॉट खेलकर अपना विकेट गंवा देते हैं।

सहवाग जैसे बनने की राह

अनिल कुंबले ने उनकी तुलना वीरेंद्र सहवाग से की है। कुंबले कहते हैं कि सहवाग ने समय के साथ अपनी पारी को पेस करना सीखा था। अभिषेक को भी यही सीखना होगा कि 200 के स्ट्राइक रेट का मतलब हर गेंद को बाउंड्री के बाहर भेजना नहीं है।

अभिषेक शर्मा के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, वे आज के समय में एक सुपर स्टार हैं। हालांकि, लीजेंड बनने का सफर केवल आक्रामक शॉट खेलने से तय नहीं होगा। मैदान पर संयम, परिस्थितियों को पढ़ने की क्षमता और अपनी तकनीकि खामियों को दूर करने की समझ ही उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाएगी।

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