सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से बाहर किसी अन्य धर्म को अपनाने पर व्यक्ति अपना अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा तुरंत खो देता है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए यह स्पष्ट किया है।
धर्मांतरण और संविधान का नया रुख कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा केवल उन व्यक्तियों के लिए है जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म का पालन करते हैं। हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को अपने पुराने फैसले में तर्क दिया था कि जाति व्यवस्था ईसाई धर्म का हिस्सा नहीं है, इसलिए धर्म परिवर्तन के बाद कोई भी व्यक्ति SC/ST एक्ट के लाभ का हकदार नहीं रह जाता। सुप्रीम कोर्ट ने अब इसे संवैधानिक रूप से सही ठहराया है।
क्या था पूरा मामला? विवाद की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब पादरी चिंथाडा आनंद ने अक्काला रामी रेड्डी के खिलाफ SC/ST एक्ट में केस दर्ज कराया था। हाई कोर्ट ने यह कहते हुए केस खारिज कर दिया कि धर्मांतरण के बाद वे SC/ST एक्ट के सुरक्षा दायरे में नहीं आते। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसे अब सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया है।
बीजेपी का रुख: नाजायज फायदा रुक गया बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक बहुत ही विचारपूर्ण निर्णय है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोग धर्म परिवर्तन के बावजूद आरक्षण और अन्य सरकारी सुविधाओं का अनुचित लाभ उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि अब इस फैसले के बाद यह दुरुपयोग रुकेगा।
विपक्ष की मिली-जुली प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खछरियावास ने कहा कि सरकार को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए, हालांकि उन्होंने इसे देशहित और संविधान के अनुरूप बताया। वहीं, कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी माना कि यह फैसला संवैधानिक प्रावधानों के दायरे में ही लिया गया है।
शिवसेना (यूबीटी) की अलग राय शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने इस मुद्दे पर अपना अलग नज़रिया रखा। उन्होंने कहा, हर धर्म में पिछड़े लोग होते हैं। बालासाहेब ठाकरे का मानना था कि समाज में केवल दो ही जातियां हैं—अमीर और गरीब। उन्होंने संकेत दिया कि आरक्षण को केवल धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
अब आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने धर्मांतरण करने वाले उन लोगों के लिए कानूनी रास्ता बंद कर दिया है जो धर्म बदलने के बाद भी SC कोटे का दावा कर रहे थे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला 1950 के उस आदेश की पुष्टि करता है जिसमें SC दर्जा विशेष धार्मिक समूहों तक सीमित रखा गया था। यह देश की कानूनी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
Delhi: On Supreme Court s ruling that conversion to Christianity results in loss of SC status, BJP MP Manan Kumar Mishra says, This is a very appropriate decision. Otherwise, so many people were taking unfair advantage of it, converting their religion and then claiming to be… pic.twitter.com/eEAI4woF8R
— IANS (@ians_india) March 24, 2026
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